संसद के मानसून सत्र के तीसरे दिन यानी बुधवार को राज्यसभा में NEET पेपर लीक विवाद को लेकर गतिरोध और गहरा गया। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी खेमे पर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र सरकार इस मामले पर बहस कराने के लिए 100 प्रतिशत तैयार है, परंतु विपक्ष बातचीत की प्रक्रिया को बाधित करने के इरादे से शर्तें लगा रहा है।
सदन को संबोधित करते हुए संसदीय कार्य मंत्री ने कहा कि बहस से बचने के हथकंडे अपनाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुकूल नहीं है। सरकार ने पहले ही दिन से स्पष्ट कर रखा है कि NEET परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम सहित हर गंभीर विषय पर सदन के भीतर जवाब दिया जाएगा। रिजिजू ने बताया कि इस संबंध में कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों से भी संवाद किया गया है। उन्होंने कहा कि चर्चा किस नियम के तहत हो, इसका निर्धारण पीठ की अध्यक्षता में सभी दलों की सामूहिक बैठक में होना चाहिए ताकि देश के युवाओं के सामने सच लाया जा सके।
दूसरी ओर, विपक्षी एकजुटता का नेतृत्व कर रहे राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार के रुख को खारिज कर दिया। विपक्ष ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की शर्त सामने रखते हुए स्पष्ट किया कि जब तक मंत्री अपने पद से हटते नहीं, तब तक कोई चर्चा स्वीकार्य नहीं होगी। खड़गे ने नीट-यूजी परीक्षा की कथित धांधली के साथ-साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं पर पुलिस बल प्रयोग का मुद्दा भी जोरदार ढंग से उठाया।
विपक्ष के कड़े तेवरों और लगातार जारी शोर-शराबे के कारण पीठ को सदन की कार्यवाही दोपहर 3 बजे तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। इस प्रकार, मानसून सत्र के तीसरे दिन भी दोनों पक्षों के बीच गतिरोध कायम रहा—जहाँ सरकार चर्चा का विकल्प खुला बताकर विपक्ष को घेर रही है, वहीं विपक्ष बिना इस्तीफे के बहस न कराने के अपने फैसले पर कायम है।