देश में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग नेटवर्क का दायरा बढ़ा, 52 हजार से अधिक स्टेशन हुए सक्रिय; 14,000 से ज्यादा ई-बसों को दी गई मंजूरी

देश में सार्वजनिक ईवी चार्जिंग नेटवर्क का दायरा बढ़ा, 52 हजार से अधिक स्टेशन हुए सक्रिय; 14,000 से ज्यादा ई-बसों को दी गई मंजूरी

भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) की बढ़ती मांग को देखते हुए केंद्र सरकार ने देशभर में चार्जिंग अवसंरचना को मजबूत करने के लिए बुनियादी ढांचे का तेजी से विस्तार शुरू कर दिया है। बीएचईएल पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में देशभर में 52,718 सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन चालू स्थिति में हैं। इनमें से 16,561 स्टेशनों को चार पहिया वाहनों के लिए फास्ट ईवी चार्जर से लैस किया गया है, ताकि वाहन चालकों को यात्रा के दौरान रेंज से जुड़ी समस्याओं का सामना न करना पड़े।

निजी इलेक्ट्रिक वाहन चालकों को सफर के दौरान किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने दो प्रमुख योजनाओं के तहत व्यापक वित्तीय सहायता मंजूर की है। सरकार ने एफएएमई-II (FAME-II) योजना के तहत 912.50 करोड़ रुपये और पीएम ई-ड्राइव (PM E-DRIVE) योजना के तहत 2,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया है। इस राशि का मुख्य उद्देश्य प्रमुख शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे ईवी पब्लिक चार्जिंग स्टेशनों (ईवीपीसीएस) का एक मजबूत नेटवर्क स्थापित करना है।

चार्जिंग नेटवर्क को अधिक सुलभ और व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से विद्युत मंत्रालय ने “इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग अवसंरचना की स्थापना और संचालन के लिए दिशानिर्देश 2024” जारी किए हैं। ये दिशानिर्देश बैटरी स्वैपिंग सुविधा और चार्जिंग पॉइंट को आपस में जोड़ने तथा एक सुरक्षित, मानकीकृत और इंटरऑपरेबल नेटवर्क तैयार करने के लिए मानक निर्धारित करते हैं। इसके साथ ही, चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की प्रक्रिया को लाइसेंस-मुक्त रखा गया है, जिससे निजी उद्यमियों और निजी निवेश को इस क्षेत्र में उतरने में काफी सुगमता हो रही है।

इलेक्ट्रिक चार पहिया वाहनों के घरेलू निर्माण और बिक्री को प्रोत्साहन देने के लिए सरकार पीएलआई-ऑटो (उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन) योजना के जरिए ऑटोमोबाइल और ऑटो घटक निर्माताओं को सहायता प्रदान कर रही है। इसके तहत अग्रणी ओईएम को एडवांस्ड ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (एएटी) वाहनों—जिसमें इलेक्ट्रिक कारें शामिल हैं—की निर्धारित अतिरिक्त बिक्री पर 13 से 18 प्रतिशत तक का वित्तीय प्रोत्साहन दिया जाता है।

सार्वजनिक परिवहन प्रणाली को पर्यावरण-अनुकूल बनाने के लिए पीएम ई-ड्राइव पहल के तहत 14,028 ई-बसों के संचालन हेतु 4,391 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत 13,800 ई-बसें देश के 7 प्रमुख बड़े शहरों—दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, मुंबई, अहमदाबाद, पुणे और सूरत के लिए आवंटित की गई हैं। इन ई-बसों के संचालन के लिए ऑपरेटरों के चयन हेतु निविदा प्रक्रिया दो चरणों में पूरी की जा चुकी है, जिसमें 10,900 बसों का पहला चरण 30 दिसंबर 2025 को और 2,900 बसों का दूसरा चरण 27 मई 2026 को संपन्न हुआ।

सार्वजनिक ई-बसों की तैनाती के मोर्चे पर 30 जून 2026 तक अहमदाबाद, हैदराबाद और सूरत की ओर से अवार्ड लेटर (एलओए) जारी किए जा चुके हैं। इसके अलावा, अनुबंध प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाते हुए हैदराबाद के लिए आवंटित 2,000 ई-बसों में से 915 बसों के लिए और सूरत की 600 बसों के लिए रियायत समझौतों पर हस्ताक्षर भी पूरे हो चुके हैं। मैदानी क्षेत्रों के अलावा पहाड़ी राज्यों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए जम्मू और कश्मीर के लिए 200 अतिरिक्त ई-बसों को स्वीकृति दी गई है। कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (सीईएसएल) और भारी उद्योग मंत्रालय राज्यों एवं राज्य परिवहन उपक्रमों (एसटीयू) के साथ नियमित समीक्षा बैठकें कर इन बसों को जल्द से जल्द सड़कों पर उतारने की प्रक्रिया में जुटे हैं।

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