केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय और आयुष मंत्रालय ने आपसी समन्वय से एक व्यापक रणनीति तैयार की है, जिसका उद्देश्य भारत को वैश्विक स्तर पर पारंपरिक स्वास्थ्य और चिकित्सा पर्यटन का मुख्य केंद्र बनाना है। देश में आयुष आधारित पर्यटन को प्रोत्साहन देने के लिए नीतिगत सुधारों से लेकर अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों तक के ठोस उपाय लागू किए गए हैं।
विदेशी नागरिकों की भारत यात्रा को सुगम बनाने के लिए 27 जुलाई 2023 को आयुष वीजा व्यवस्था लागू की गई थी। इसके तहत आयुष उपचार (M-3) तथा आयुष परिचारक (M-4) जैसी उप-श्रेणियां बनाई गई हैं। इन विशेष वीजा प्रावधानों के माध्यम से विदेशी मरीज और उनके साथ आने वाले अटेंडेंट बिना किसी प्रशासनिक रुकावट के भारत में आयुष आधारित स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं।
वैश्विक बाजार में आयुष सेवाओं की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए दिसंबर 2025 में द्वितीय वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन में ‘आयुष गुणवत्ता चिह्न’ पेश किया गया। यह कदम विश्व स्तरीय सुरक्षा मानकों और प्रभावशीलता को सुनिश्चित करता है। इससे पूर्व, उपचार की गुणवत्ता और नैदानिक निर्णयों में एकरूपता बनाए रखने के उद्देश्य से मानकीकृत उपचार दिशानिर्देशों का प्रकाशन और क्रियान्वयन पहले ही किया जा चुका है।
प्रशिक्षण और अकादमिक मानकों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से राजपत्र अधिसूचना के जरिए दिसंबर 2019 में राष्ट्रीय आयुर्वेद विद्यापीठ के प्रशासनिक ढांचे में आयुर्वेद प्रशिक्षण प्रत्यायन बोर्ड (ATAB) की स्थापना की गई थी। यह बोर्ड भारत और विदेशों के उन आयुर्वेद पाठ्यक्रमों को मान्यता प्रदान करता है जो पारंपरिक सांविधिक निकायों के अंतर्गत नहीं आते। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय आयुष फेलोशिप कार्यक्रम के जरिए विदेशी छात्रों को भारतीय संस्थानों में पढ़ने के लिए छात्रवृत्ति दी जा रही है।
औपचारिक सहयोग को गति देने के लिए आयुष मंत्रालय ने ITDC के साथ करार किया है। इसके प्रचार अभियान के हिस्से के रूप में आयुष मेडिकल वैल्यू ट्रेवल पर दो बड़े क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जा चुके हैं—पहला सम्मेलन 30 सितंबर 2024 को मुंबई में और दूसरा 26 मई 2025 को चेन्नई में संपन्न हुआ।
आयुष उत्पादों के निर्यात और अंतरराष्ट्रीय मान्यता को बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्रीय क्षेत्र की ‘अंतरराष्ट्रीय सहयोग योजना’ संचालित की जा रही है। यह योजना भारतीय आयुष दवा निर्माताओं और सेवा प्रदाताओं को विदेशी बाजारों में विस्तार, अंतरराष्ट्रीय अकादमिक चेयर्स की स्थापना, कार्यशालाओं के आयोजन और अनुसंधान में सहायता करती है। इस योजना के अंतर्गत वर्तमान में 27 देश-दर-देश समझौते, 16 आयुष चेयर समझौते और 57 संस्थान-स्तरीय समझौते अस्तित्व में हैं।
वैश्विक साझेदारी को और गहरा करते हुए, 17–19 दिसंबर 2025 के दौरान नई दिल्ली में भारत सरकार और WHO के सह-आयोजन में द्वितीय वैश्विक पारंपरिक चिकित्सा शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया। इस वैश्विक मंच पर आयुष मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय नीति निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया और पारंपरिक चिकित्सा तथा मेडिकल वैल्यू ट्रेवल के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए विभिन्न देशों के साथ 16 द्विपक्षीय वार्ताएं आयोजित कीं।