समुद्री मार्ग से दुबई भेजे गए उत्तर प्रदेश के 12.5 टन दशहरी और लंगड़ा आम, किसानों को मिला ज्यादा मुनाफा

समुद्री मार्ग से दुबई भेजे गए उत्तर प्रदेश के 12.5 टन दशहरी और लंगड़ा आम, किसानों को मिला ज्यादा मुनाफा

कृषि निर्यात के क्षेत्र में भारत ने एक नई उपलब्धि हासिल की है। उत्तर प्रदेश के अमरोहा से 12.5 टन प्रीमियम दशहरी और लंगड़ा आम की एक बड़ी खेप को समुद्री मार्ग के जरिए संयुक्त अरब अमीरात (दुबई) सफलतापूर्वक भेजा गया। इस पूरी प्रक्रिया को आईसीएआर-केंद्रीय उपोष्णकटिबंधीय बागवानी संस्थान (आईसीएआर-सीआईएसएच), लखनऊ और कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) द्वारा संयुक्त रूप से तैयार किए गए विशेष ‘समुद्री मार्ग निर्यात प्रोटोकॉल’ के तहत अंजाम दिया गया।

इस खेप का निर्यात अमरोहा की शहनाज एक्सपोर्ट्स द्वारा अत्ताशी ग्लोबल के साथ मिलकर यूएई की प्रमुख रिटेल शृंखला ‘लुलु ग्रुप’ के लिए किया गया। इस व्यापारिक प्रयास में एपीडा ने आवश्यक सहयोग दिया, जबकि आईसीएआर-सीआईएसएच ने वैज्ञानिक और तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया। फलों को 40 फीट के विशेष रेफ्रिजरेटेड कंटेनर में रखकर भेजा गया था।

निर्यात की प्रक्रिया के तहत 22 जून को आमों की तुड़ाई की गई, जिसके बाद कटाई-उपरांत प्रबंधन के वैज्ञानिक मानकों का पालन किया गया। फलों की शेल्फ लाइफ (भंडारण क्षमता) बढ़ाने के लिए सीआईएसएच द्वारा विकसित ‘मेटवॉश’ तकनीक से उन्हें उपचारित किया गया। इसके बाद अमरोहा के पैक हाउस में आमों की वैज्ञानिक ग्रेडिंग और पैकिंग की गई, फिर उन्हें निर्बाध कोल्ड चेन व्यवस्था के माध्यम से 40 फीट के रेफ्रिजरेटेड कंटेनर में लोड करके दुबई रवाना कर दिया गया।

रास्ते में पश्चिमी विक्षोभ की वजह से हुई देरी के कारण यह खेप 25 दिनों के लंबे सफर के बाद 17 जुलाई 2026 को दुबई पहुंची। इतनी लंबी पारगमन अवधि के बावजूद लगभग 90 प्रतिशत आम बिल्कुल ताजा और बिक्री के योग्य पाए गए। यह परिणाम सीआईएसएच द्वारा विकसित तकनीक और प्रोटोकॉल की सफलता को साबित करता है।

उत्तर प्रदेश से दुबई के लिए दशहरी और लंगड़ा किस्मों की यह पहली सफल व्यावसायिक समुद्री खेप है। चूंकि समुद्री मार्ग से माल भेजना हवाई मार्ग की तुलना में काफी सस्ता पड़ता है, इसलिए निर्यातकों की रसद लागत में भारी कमी आई। इस बचत का सीधा फायदा किसानों को मिला और निर्यातकों ने उनसे अधिक दाम पर फसल खरीदी, जिससे उत्पादकों को प्रति किलोग्राम 15 से 20 रुपये तक की अतिरिक्त आय हुई।

इस सफल परीक्षण ने साबित कर दिया है कि गुणवत्ता से समझौता किए बिना समुद्री मार्ग से भारतीय आमों का किफायती निर्यात संभव है। उम्मीद जताई जा रही है कि इस नई व्यवस्था से उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों के आम उत्पादकों को खाड़ी और अंतरराष्ट्रीय बाजारों का बड़ा आधार मिलेगा, जिससे कृषि आय में वृद्धि होगी और किसानों की आजीविका सुधरेगी।

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