साइबर अपराधों पर मध्य प्रदेश पुलिस का बड़ा प्रहार: राजगढ़ में ठगी के शत-प्रतिशत पैसे कराए वापस, केरल व महाराष्ट्र से पकड़ाए जालसाज

साइबर अपराधों पर मध्य प्रदेश पुलिस का बड़ा प्रहार: राजगढ़ में ठगी के शत-प्रतिशत पैसे कराए वापस, केरल व महाराष्ट्र से पकड़ाए जालसाज

मध्य प्रदेश में साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस का अभियान रंग ला रहा है। राजगढ़ और नर्मदापुरम जिलों में पुलिस ने हाल ही में प्रभावी कार्रवाई करते हुए ठगी के अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है और पीड़ितों को उनकी गँवाई हुई राशि वापस दिलवाई है। पुलिस की इस तत्परता से यह साबित हो गया है कि तकनीकी जांच, बैंकिंग तंत्र से त्वरित तालमेल और समय पर दर्ज कराई गई शिकायत से साइबर फ्रॉड के शिकार लोगों को राहत पहुँचाना संभव है।

मामले के अनुसार, राजगढ़ में साइबर ठगों ने एक ऑटो चालक को डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी और खुद को पुलिसकर्मी बताकर अश्लील सामग्री देखने के फर्जी आरोप में 60 हजार रुपये ऐंठ लिए। राजगढ़ पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए न केवल पीड़िता की पूरी रकम वापस दिलाई, बल्कि उत्तर प्रदेश से दो आरोपियों को गिरफ्तार भी किया। इस मामले में एक नाबालिग को भी चिन्हित किया गया है। वहीं, राजगढ़ के एक अन्य मामले में पीड़ित का डीमैट अकाउंट हैक कर शेयर मार्केट में भारी रिटर्न का झांसा देकर 1 लाख 64 हजार रुपये की धोखाधड़ी की गई थी। पुलिस ने इस मामले में भी पूरी राशि बरामद कर राजस्थान के आरोपी पर कानूनी शिकंजा कसा है।

उधर नर्मदापुरम के देहात थाना क्षेत्र में ZODIAC कंपनी का कस्टमर केयर अधिकारी बनकर एक महिला से कपड़े की बुकिंग का रिफंड देने के नाम पर 99 हजार रुपये की चपत लगाई गई थी। नर्मदापुरम साइबर सेल ने डिजिटल साक्ष्यों और बैंक खातों की पड़ताल के आधार पर दबिश देकर केरल और महाराष्ट्र से दो आरोपियों को हिरासत में लिया है।

राजगढ़ में जहाँ दोनों पीड़ितों को कुल 2 लाख 24 हजार रुपये की शत-प्रतिशत राशि लौटा दी गई है, वहीं नर्मदापुरम पुलिस गिरफ्तार अंतरराज्यीय आरोपियों से गहन पूछताछ कर रही है। इन मामलों की सफलता में पुलिस और वित्तीय संस्थानों के बीच का तत्काल समन्वय सबसे अहम साबित हुआ।

घटनाक्रम के बाद मध्य प्रदेश पुलिस ने दिशा-निर्देश जारी करते हुए आम जनता को सतर्क किया है। पुलिस ने चेतावनी दी है कि किसी भी अनजान कॉल या मैसेज पर अपना ओटीपी, बैंक डिटेल, यूपीआई पिन या पासवर्ड न दें। पुलिस ने स्पष्ट किया कि “डिजिटल अरेस्ट” का कोई कानूनी वजूद नहीं है। यदि कोई व्यक्ति सरकारी एजेंसी या बैंक का अधिकारी बनकर डराए या लालच देकर पैसे माँगे, तो उसकी बातों में न आएं। धोखाधड़ी होते ही ‘गोल्डन ऑवर’ का लाभ उठाते हुए तत्काल 1930 हेल्पलाइन पर संपर्क करें या साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत करें, जिससे वित्तीय नुकसान को रोका जा सके।

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