लोकसभा में एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 पारित, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के रवैये की कड़े शब्दों में की आलोचना

लोकसभा में एंटी-पेपर लीक संशोधन विधेयक 2026 पारित, केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के रवैये की कड़े शब्दों में की आलोचना

लोकसभा ने बुधवार को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ को ध्वनिमत से अपनी मंजूरी दे दी। इस महत्वपूर्ण विधेयक पर सदन में विस्तृत चर्चा हुई, जिसके समापन के बाद लोकसभा की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। चर्चा के दौरान सरकार का पक्ष रखते हुए केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने विपक्ष के रुख पर कड़ी आपत्ति जताई।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि परीक्षाओं की पारदर्शिता से जुड़े इस अत्यंत संवेदनशील मुद्दे पर विपक्ष गंभीरता दिखाने में पूरी तरह विफल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जनहित के इस विधेयक पर सकारात्मक और रचनात्मक सुझाव देने के स्थान पर विपक्षी दल केवल राजनीतिक लाभ साधने का प्रयास कर रहे हैं।

विपक्ष के नेता के वक्तव्य पर हमला बोलते हुए जितेंद्र सिंह ने उनके द्वारा इस्तेमाल की गई शब्दावली को असंसदीय और अमर्यादित करार दिया। उन्होंने कहा कि संसदीय परंपराओं और गरिमा का दावा करने वाले जनप्रतिनिधियों को इस प्रकार की भाषा के प्रयोग से बचना चाहिए। मंत्री ने स्पष्ट किया कि विपक्ष के नेता द्वारा इस्तेमाल किए गए शब्द इतने अनुचित थे कि उन्हें दोहराना भी उचित नहीं है।

जितेंद्र सिंह ने आगे कहा कि देश के युवाओं के लिए ‘मूर्ख’ जैसे शब्द का चयन बेहद आपत्तिजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने सवाल उठाया कि युवाओं, जो राष्ट्र के निर्माण की रीढ़ हैं, के प्रति इस तरह की सोच रखना संसदीय मर्यादाओं और नियमों के प्रति अज्ञानता को दर्शाता है।

अतीत की एक घटना का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष के नेता पर तंज भी कसा। उन्होंने कहा कि 21 जुलाई को विपक्ष के नेता प्रधानमंत्री आवास (7 एलकेएम) के बाहर जाकर बैठ गए थे। ऐसा प्रतीत होता है कि सत्ता प्राप्त न होने की निराशा में उन्होंने यह कदम उठाया। जब अधिकारियों ने उन्हें उनके पद और कद की गरिमा का स्मरण कराया, तो उन्होंने केवल खुद को वहां से हटाए जाने की बात कही।

सदन में सुरक्षा बल की कार्रवाई से संबंधित विपक्ष के एक अन्य दावे को खारिज करते हुए जितेंद्र सिंह ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि संबंधित घटना में पुलिस द्वारा कोई गोलीबारी नहीं की गई थी, बल्कि स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केवल आंसू गैस के गोले छोड़े गए थे। उन्होंने कहा कि जब गोली चली ही नहीं, तो आदेश देने का प्रश्न ही उत्पन्न नहीं होता; वैसे भी ऐसे आदेश देने का अधिकार मंत्री के पास नहीं बल्कि कार्यकारी मजिस्ट्रेट के पास होता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *