ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का भव्य समापन, भारत को मिली 2030 के ऐतिहासिक शताब्दी संस्करण की मेजबानी

ग्लासगो में कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का भव्य समापन, भारत को मिली 2030 के ऐतिहासिक शताब्दी संस्करण की मेजबानी

स्कॉटलैंड के ग्लासगो स्थित ओवीओ हाइड्रो स्टेडियम में रविवार को 11 दिनों तक चले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 का समापन क्लोजिंग सेरेमनी के साथ हुआ, जहां भारत को 2030 में आयोजित होने वाले अगले राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी औपचारिक रूप से सौंपी गई। समारोह के दौरान कॉमनवेल्थ गेम्स का ध्वज गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी, भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की अध्यक्ष पीटी उषा और स्टार भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा को प्रतीकात्मक रूप से सौंपा गया। इस हस्तांतरण के साथ ही वर्ष 2030 में अहमदाबाद में आयोजित होने वाले खेलों के 100वें वर्षगांठ संस्करण की आधिकारिक उल्टी गिनती शुरू हो गई है।

समापन समारोह की शुरुआत स्कॉटिश संस्कृति और संगीत के प्रदर्शन के साथ हुई, जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध रॉक बैंड ‘सिंपल माइंड्स’, डांस ग्रुप ‘डायवर्सिटी’ और कई स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दीं। इसके पश्चात औपचारिक ध्वज हस्तांतरण की प्रक्रिया पूरी हुई, जिसके बाद 18 मिनट 27 सेकंड की भारतीय सांस्कृतिक प्रस्तुति ने पूरे स्टेडियम का ध्यान आकर्षित किया। इस प्रस्तुति में भारत की समृद्ध विरासत, खेलों के प्रति जुनून और अहमदाबाद 2030 के दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया गया।

भारतीय कार्यक्रम की शुरुआत “भारत, जहां खेल जीवन जीने का एक तरीका है” के वॉयस-ओवर के साथ हुई। पूरी प्रस्तुति चार प्रमुख भागों में विभाजित थी। पहला भाग ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना तथा ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ पर आधारित था, जिसमें शांति और समावेशिता का संदेश दिया गया। इसके बाद एक विशेष शॉर्ट फिल्म के माध्यम से राष्ट्रमंडल खेलों में भारत की यात्रा, उपलब्धियों और वैश्विक खेल मंच पर देश की बढ़ती साख को दिखाया गया।

तीसरे चरण में भारतीय संगीतकार ऋषभ शर्मा और स्कॉटिश कलाकार रॉस एन्सली के बीच जुगलबंदी देखने को मिली, जिसने दोनों देशों की सांस्कृतिक परंपराओं के मेल को दर्शाया। अंतिम चरण में मशहूर गायक शंकर महादेवन, भूमि त्रिवेदी और ऋषभ शर्मा ने ‘वंदे मातरम’, ‘शिव स्तोत्र’ और ‘सुनो गौर से दुनिया वालों’ जैसे गीतों की प्रस्तुति दी। स्टेडियम में मौजूद भारतीय और विदेशी दर्शक इन प्रस्तुतियों पर झूमते नजर आए।

खेलों के समापन के दौरान एथलीटों की पारंपरिक परेड आयोजित की गई, जिसमें राष्ट्रमंडल मुक्केबाजी चैंपियन जैस्मिन लैंबोरिया ने भारतीय ध्वजवाहक की भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व में सभी 74 राष्ट्रमंडल देशों और क्षेत्रों के खिलाड़ियों ने एक साथ मार्च पास्ट किया। उल्लेखनीय है कि 2030 का यह आयोजन राष्ट्रमंडल खेलों की 100वीं वर्षगांठ होगी, और भारत, ऑस्ट्रेलिया के बाद दो बार इन खेलों की मेजबानी करने वाला दुनिया का दूसरा देश बन जाएगा।

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