भारत ने मंगलवार को विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस ब्रीफिंग में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में आयोजित चुनावी प्रक्रिया को एक ढोंग करार देते हुए खारिज कर दिया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने विश्व बिरादरी से अपील की कि वह क्षेत्र में आम जनता पर हो रहे प्रशासनिक अत्याचारों और सुरक्षा बलों की बर्बरता का संज्ञान ले।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, पीओके की जमीनी हकीकत चुनावी दावों के ठीक विपरीत है। जून के महीने से जारी विरोध प्रदर्शनों पर पाकिस्तानी बलों द्वारा की गई हिंसक कार्रवाई में अब तक 90 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और बड़ी संख्या में नागरिक जख्मी हुए हैं। वहां का शासन जनता के असंतोष को शांत करने के बजाय नेटवर्क ब्लैकआउट, दमनकारी रवैये और गोलीबारी के ज़रिए आवाज दबाने में लगा हुआ है।
पीओके में जारी इस असंतोष की अगुवाई ‘जम्मू और कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (जेकेजेएएसी) कर रही है, जिसने 5 जून को आंदोलन की शुरुआत की थी। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की इस दमनकारी कार्रवाई और गोलीबारी पर वैश्विक स्तर पर भी चिंता व्यक्त की जा रही है।
भारत ने वैश्विक मंचों से आग्रह किया है कि वे चुनावी नौटंकी के जरिए वैधता का भ्रम पैदा करने की पाकिस्तानी कोशिशों को समझें। प्रवक्ता ने कहा कि मानवाधिकारों का पाठ पढ़ाने वाले पाकिस्तान का असली चेहरा दुनिया के सामने आना चाहिए और ऐसे मानवाधिकार हनन के लिए उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए।
इसके अतिरिक्त, सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर प्रवक्ता ने भारत के दृढ़ संकल्प को दोहराया। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की याद दिलाते हुए कहा कि भारत ने पूर्व में कैसा जवाब दिया था, यह सभी ने देखा है। भारत ने सभी देशों से अपील की कि वे सीमा पार आतंकवाद और इसे बढ़ावा देने वालों के विरुद्ध कठोर रुख अपनाएं, और पाकिस्तान को अपनी सरजमीं से संचालित आतंकी नेटवर्क को समाप्त करने के लिए बाध्य करें।