विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने बुधवार को कोलंबो में श्रीलंका की अपनी समकक्ष अरुनी रनराजा से मुलाकात कर एक दिवसीय दौरे की शुरुआत की। इस दौरान दोनों अधिकारियों ने भारत और श्रीलंका के बीच रणनीतिक व द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ करने के उपायों पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में साझा हित वाले क्षेत्रीय और वैश्विक विषयों पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया।
भारतीय उच्चायोग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि बातचीत के दौरान भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति और ‘विजन महासागर’ को आगे बढ़ाने में श्रीलंका की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया गया। विदेश सचिव ने इन पहलों में श्रीलंका की भागीदारी को अत्यंत आवश्यक बताया।
कोलंबो प्रवास के दौरान विक्रम मिस्री ने श्रीलंका के विदेश मंत्री विजिता हेराथ से भी मुलाकात की। इस बैठक में भारत के उच्चायुक्त संतोष झा और दोनों देशों के अन्य वरिष्ठ राजनयिक उपस्थित थे। दोनों पक्षों ने प्राथमिकता वाले विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में चल रही द्विपक्षीय सहयोग परियोजनाओं की समीक्षा की। भारतीय मिशन के अनुसार, यह नियमित उच्च स्तरीय संवाद दोनों देशों के बीच चल रही पहलों को नई ऊर्जा और गति प्रदान करेगा।
अपने इस संक्षिप्त दौरे के तहत विदेश सचिव का राष्ट्रपति अनुर कुमारा दिसानायके, प्रधानमंत्री हरिणी अमरसूर्या और अन्य वरिष्ठ श्रीलंकाई नेताओं से भी मिलने का कार्यक्रम है। इन बैठकों में दोनों देशों के बीच बहुआयामी सहयोग के विविध पहलुओं पर चर्चा होने की संभावना है।
द्विपक्षीय सहयोग के तहत मंगलवार को भारतीय उच्चायुक्त संतोष झा ने श्रीलंका के स्वास्थ्य मंत्री नलिनदा जयतिस्सा को 500 लीटर तकनीकी मालाथियॉन दवा सौंपी, जो श्रीलंका में डेंगू के प्रकोप को नियंत्रित करने में सहायक होगी। इससे पूर्व, साल 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्रीलंका की आधिकारिक यात्रा की थी, जो वर्ष 2024 में राष्ट्रपति दिसानायके के पद संभालने के बाद किसी भी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख का पहला श्रीलंका दौरा था। उस दौरान दोनों राष्ट्रों ने रक्षा सहयोग, स्वास्थ्य, जनसंचार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी से जुड़े सात प्रमुख समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए थे।