वर्ष 2035 तक पूरी तरह सक्रिय होगा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, गगनयान मिशन के तहत 2026 की अंतिम तिमाही में पहली मानवरहित उड़ान: डॉ. जितेंद्र सिंह

वर्ष 2035 तक पूरी तरह सक्रिय होगा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन, गगनयान मिशन के तहत 2026 की अंतिम तिमाही में पहली मानवरहित उड़ान: डॉ. जितेंद्र सिंह

केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने संसद को सूचित किया है कि भारत का अपना अंतरिक्ष स्टेशन, ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ (BAS), वर्ष 2035 तक पूर्ण रूप से कार्यात्मक हो जाएगा। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने पांच प्रमुख मॉड्यूल वाली इस समग्र परियोजना की रूपरेखा तैयार कर ली है, और इसके पहले मॉड्यूल ‘बीएएस-01’ के निर्माण तथा प्रक्षेपण को सरकार से मंजूरी मिल चुकी है। वर्तमान में इसरो के विभिन्न वैज्ञानिक केंद्रों में बीएएस-01 की सिस्टम इंजीनियरिंग और उप-प्रणालियों का विकास कार्य तेजी से प्रगति पर है।

बुधवार को लोकसभा में एक लिखित प्रश्न के उत्तर में केंद्रीय मंत्री ने बताया कि गगनयान कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न नई तकनीकों को परखने के लिए पहला मानवरहित प्रायोगिक मिशन वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में प्रक्षेपित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस दौरान हाफ-ह्यूमनॉइड रोबोट ‘व्योममित्र’ की क्षमताओं को भी प्रमाणित किया जाएगा। इसके उपरांत, मानवयुक्त मिशन जैसी समान संरचना वाले दो अन्य मानवरहित परीक्षण किए जाएंगे, जिसके बाद वर्ष 2027 तक भारत के पहले मानवयुक्त गगनयान मिशन को अंतरिक्ष में भेजा जाएगा।

अंतरिक्ष विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, मानव अंतरिक्ष उड़ान के लिए आवश्यक मानक प्रणालियों और आधारभूत ढांचे को विकसित करने में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। ‘ह्यूमन रेटेड एलवीएम3’ (HLVM3) रॉकेट के सभी प्रणोदन (प्रोपल्शन) चरणों और संरचनाओं के जमीनी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए जा चुके हैं। वहीं, ऑर्बिटल मॉड्यूल के तहत क्रू और सर्विस मॉड्यूल की प्रणोदन प्रणालियों के परीक्षण के साथ-साथ पर्यावरण नियंत्रण एवं जीवन रक्षक प्रणाली (ECLSS) का इंजीनियरिंग मॉडल तैयार कर लिया गया है। इसके अतिरिक्त, क्रू एस्केप सिस्टम (CES) की सभी पांचों मोटरों के स्थैतिक परीक्षण और मुख्य संरचनात्मक प्रमाणन पूरे हो चुके हैं।

अभियान की सुरक्षा और बुनियादी तैयारी को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से टीवी-डी1 टेस्ट व्हीकल मिशन और एकीकृत एयर ड्रॉप टेस्ट (IADT-01 व IADT-02) को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है, जबकि टीवी-डी2 मिशन की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण के लिए विशेष केंद्र, गगनयान नियंत्रण केंद्र, ऑर्बिटल मॉड्यूल तैयारी सुविधा और दूसरे प्रक्षेपण परिसर में आवश्यक तकनीकी बदलाव पूर्ण कर लिए गए हैं। इसके अलावा, ग्राउंड नेटवर्क कॉन्फिगरेशन, आईडीआरएसएस-1 फीडर स्टेशन और रिकवरी संचालन संबंधी योजनाओं को भी अंतिम रूप दिया जा चुका है।

इस महत्वाकांक्षी गगनयान कार्यक्रम का दायरा बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2024 में कुल 8 अभियानों को पूरा करने के लिए 20,193 करोड़ रुपये के संशोधित बजटीय आवंटन की स्वीकृति प्रदान की थी। इस संपूर्ण परियोजना के लिए जमीनी स्तर पर विभिन्न योग्यता परीक्षण लगातार किए जा रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग के मोर्चे पर, इसरो कई वैश्विक अंतरिक्ष एजेंसियों के साथ मिलकर कार्य कर रहा है। यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी गगनयान अभियानों के लिए नेटवर्क सहायता दे रही है, जबकि ऑस्ट्रेलियाई अंतरिक्ष एजेंसी के साथ क्रू मॉड्यूल की समुद्र से रिकवरी के लिए समझौता हुआ है। फ्रांस ने इसरो के फ्लाइट सर्जनों और ग्राउंड टीमों को प्रशिक्षित किया है। वहीं, रूस की अंतरिक्ष एजेंसी ‘रोस्कोस्मोस’ के साथ हुए समझौते के तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को गागरिन कॉस्मोनॉट ट्रेनिंग सेंटर में प्रारंभिक प्रशिक्षण दिया गया है तथा क्रू सीट, स्पेस सूट और विंड टनल परीक्षण जैसी सुविधाएं प्राप्त की गई हैं।

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