अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने देश में जन्मसिद्ध नागरिकता के नियमों को सख्त बनाने के उद्देश्य से दो नए कार्यकारी आदेशों पर दस्तखत कर दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनके पूर्ववर्ती आदेश को रद्द किए जाने के बाद यह कदम उठाया गया है। व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में इन आदेशों को मंजूरी देते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला बेहद करीबी अंतर से उनके खिलाफ रहा, जिसके कारण प्रशासन को नियमों में आवश्यक संशोधन करने पड़े हैं।
प्रशासन द्वारा जारी किए गए पहले आदेश का प्राथमिक उद्देश्य ‘बर्थ टूरिज्म’ की प्रथा पर अंकुश लगाना है। इसके तहत यदि कोई विदेशी नागरिक गैर-इमिग्रेंट वीजा के माध्यम से केवल अमेरिका में बच्चे को जन्म देने के इरादे से प्रवेश करता है, या कोई संस्था व व्यक्ति ऐसे प्रयासों में सहायता प्रदान करता है, तो उस पर कड़े प्रतिबंध लागू होंगे।
वहीं, दूसरे कार्यकारी आदेश के माध्यम से जन्म के आधार पर नागरिकता प्राप्त करने से वंचित किए जाने वाले व्यक्तियों का दायरा बढ़ा दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत विदेशी सरकारों के राजनयिकों व कर्मचारियों, घोषित आतंकवादी संगठनों से जुड़े सदस्यों और फर्जीवाड़े के जरिए नागरिकता हासिल करने की कोशिश करने वालों की संतानों को अमेरिकी नागरिकता के लिए अयोग्य घोषित किया गया है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 1868 में लागू अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के अनुसार, अमेरिका में पैदा हुए या इसके अधिकार क्षेत्र में आने वाले सभी व्यक्तियों को स्वतः ही देश की नागरिकता प्राप्त हो जाती है। राष्ट्रपति ट्रंप ने 20 जनवरी 2025 को अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में इस व्यवस्था में बदलाव के लिए आदेश जारी किया था, जिसमें अवैध या अस्थायी वीजा पर रह रहे लोगों के बच्चों को नागरिकता के अधिकार से बाहर करने का प्रावधान था।
हालांकि, कानूनी चुनौतियों के बाद निचली अदालतों ने इस पर रोक लगा दी थी। तत्पश्चात, 30 जून को सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से ट्रंप प्रशासन के उस फैसले को खारिज करते हुए जन्मसिद्ध नागरिकता के अधिकार को यथावत बनाए रखा था। सर्वोच्च न्यायालय के उसी रुख को देखते हुए अब ट्रंप सरकार ने नए सिरे से कड़े कानूनी प्रावधान लागू किए हैं।
संस्करण 2