केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने गुरुवार को ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित 13वें ब्रिक्स शिक्षा सम्मेलन के दौरान दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया और ईरान के शिक्षा मंत्रियों के साथ पृथक द्विपक्षीय बैठकें संपन्न कीं। इस दौरान चारों देशों के मध्य अकादमिक आदान-प्रदान, डिजिटल शिक्षा, नवाचार और अनुसंधान के क्षेत्रों में आपसी तालमेल बढ़ाने पर सहमति बनी।
दक्षिण अफ्रीकी मंत्री सिविवे ग्वारुबे तथा उप मंत्री डॉ. नोमुसा ड्यूबे-नक्यूब के साथ आयोजित वार्ता में प्राथमिक से लेकर उच्च शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण को सुदृढ़ करने के उपायों पर विचार हुआ। बैठक में भारत ने अपनी ‘निपुण भारत’, ‘परख’, ‘स्वयं’ तथा ‘समर्थ’ जैसी प्रमुख योजनाओं के प्रारूप और सफलता को प्रस्तुत किया। दोनों देशों ने लंबित द्विपक्षीय शिक्षा समझौतों की प्रक्रिया को तेज कर जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
इंडोनेशिया के उच्च शिक्षा, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ब्रायन युलियार्तो से बातचीत करते हुए प्रह्लाद जोशी ने उच्च शिक्षा और शोध क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग की रूपरेखा पर चर्चा की। उन्होंने आईआईटी मद्रास ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन एवं इंडोनेशिया के संबंधित मंत्रालय के बीच हस्ताक्षरित एमओयू को एक महत्वपूर्ण कदम बताया, जिससे दोनों देशों में प्रतिभा विकास और नवाचार को बढ़ावा मिलेगा।
ईरान के कार्यवाहक मंत्री प्रो. मसूद शम्स-बख्श के साथ हुई मुलाकात में भारत-ईरान के सदियों पुराने सांस्कृतिक व सभ्यतागत संबंधों को आधुनिक शिक्षा तथा तकनीक के मंच पर आगे ले जाने पर जोर दिया गया। बातचीत के दौरान डिजिटल माध्यमों से ज्ञान साझा करने और दोनों देशों के विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं के लिए नए शैक्षणिक अवसर निर्मित करने पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया और ईरान के साथ स्थापित यह शैक्षणिक समन्वय युवाओं के सशक्तीकरण और नवाचार-संचालित प्रगति को दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।