संसद के मॉनसून सत्र के दौरान विधायी कामकाज में आ रही रुकावटों को समाप्त करने के उद्देश्य से केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ऐलान किया है कि सरकार छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों तथा उनसे जुड़े सभी विषयों पर व्यापक बहस के लिए पूरी तरह तैयार है। हालांकि, उन्होंने शर्त रखी कि विपक्ष को गृह मंत्री अमित शाह के संबोधन और सरकारी पक्ष के वक्तव्य के दौरान सदन में पूर्ण शांति और व्यवस्था बनाए रखनी होगी।
संसदीय कार्य मंत्री ने जोर देकर कहा कि केंद्र सरकार छात्र आंदोलनों से जुड़े प्रत्येक प्रश्न का उत्तर देने को तत्पर है। उन्होंने कांग्रेस और अन्य विपक्षी खेमों से अपील की कि चर्चा शुरू होने के उपरांत मुद्दे से भटकाने या सदन की कार्यवाही को बाधित करने के बजाय गंभीर बहस का परिचय दिया जाए। राम मंदिर से जुड़े सवाल पर रिजिजू ने कहा कि यूपी प्रशासन द्वारा एसआईटी गठन समेत कई दंडात्मक व प्रशासनिक कदम उठाए जा चुके हैं, अतः इस समय सरकार का मुख्य ध्यान छात्र कल्याण और आंदोलनों से जुड़े विषयों पर चर्चा सुनिश्चित करना है।
संसदीय गतिविधियों और महत्वपूर्ण विधेयकों पर विचार व्यक्त करते हुए केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि इस सत्र में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन बिल का आना कठिन प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि परिसीमन एक राष्ट्रीय विषय है जिस पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया जाना चाहिए। राहुल गांधी के बयानों का उत्तर देते हुए अठावले ने कहा कि कांग्रेस के दौर में भी लाठीचार्ज और पुलिस कार्रवाई की घटनाएं दर्ज की गई थीं, अतः विपक्ष को विरोध के स्थान पर सदन के पटल पर तर्कसंगत बहस का मार्ग चुनना चाहिए।
इस बीच, केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वे खुद को सदन का अध्यक्ष समझने की भूल न करें। उन्होंने कहा कि जनता विपक्ष के इस चयनात्मक विरोध को समझ रही है। प्रधानमंत्री के प्रति विपक्ष की बयानबाजी पर पलटवार करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को किसी के प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है; वे युवाओं के बीच लोकप्रिय हैं, जिसका प्रमाण हाल ही में आईआईटी दिल्ली में हुआ उनका सीधा संवाद है।
झारखंड के परिदृश्य पर केंद्रीय मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि राज्य के छात्रों की कई मांगों को स्वीकार कर लिया गया है, किंतु सीबीआई जांच की मांग पर उनका प्रदर्शन जारी है, जो उनका संवैधानिक अधिकार है। भाजपा सांसद विष्णुदयाल राम ने कटाक्ष करते हुए कहा कि झारखंड में झामुमो सरकार का हिस्सा बनी कांग्रेस छात्रों के शांतिपूर्ण आंदोलन के मामले में दोहरा दृष्टिकोण अपना रही है।
सदन में एफसीआरए कानून से जुड़े हंगामे पर पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद दिनेश शर्मा ने कहा कि कांग्रेस, सपा, द्रमुक और टीएमसी जैसी पार्टियां विकास और संसदीय परंपराओं को छोड़कर केवल नारेबाजी में रुचि रखती हैं। वहीं, सांसद सुजीत कुमार ने अमेरिकी सांसद राइली मूर द्वारा एफसीआरए विधेयक पर दिए गए कथित भ्रामक बयान का खंडन करते हुए उन्हें स्थिति स्पष्ट करने हेतु पत्र भेजने की जानकारी दी। सांसद मनोज तिवारी ने राहुल गांधी की राजनीतिक साख पर टिप्पणी की, जबकि सांसद दामोदर अग्रवाल ने दोहराया कि संसदीय कार्य मंत्री सभी दलों को विश्वास में लेकर विधायी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं।