शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट: सेंसेक्स 70 अंक और निफ्टी 29 अंक फिसलकर बंद, फार्मा व मेटल सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव

शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन गिरावट: सेंसेक्स 70 अंक और निफ्टी 29 अंक फिसलकर बंद, फार्मा व मेटल सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव

शुक्रवार को घरेलू शेयर बाजार में लगातार चौथे कारोबारी सत्र के दौरान सुस्ती और गिरावट का रुख देखने को मिला। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स 70.71 अंक यानी 0.09 फीसदी टूटकर 78,009.25 के स्तर पर आ गया। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 29.85 अंक अथवा 0.12 प्रतिशत गिरकर 24,366 के अंक पर बंद हुआ।

बाजार में इस नरमी की मुख्य वजह फार्मास्यूटिकल और मेटल क्षेत्र के शेयरों में रही बिकवाली रही। सेक्टोरल सूचकांकों पर नजर डालें तो निफ्टी फार्मा में 0.90 फीसदी और निफ्टी मेटल में 0.71 फीसदी की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इसके अतिरिक्त निफ्टी ऑटो 0.63 फीसदी, निफ्टी पीएसयू बैंक 0.57 फीसदी, निफ्टी कमोडिटीज 0.56 फीसदी, निफ्टी पीएसई 0.51 फीसदी, निफ्टी ऑयल एंड गैस 0.47 फीसदी और निफ्टी हेल्थकेयर इंडेक्स 0.46 फीसदी लुढ़ककर बंद हुए।

दूसरी तरफ, कमजोर माहौल के बीच कुछ सेक्टर्स में खरीदारी का रुख भी रहा। निफ्टी मीडिया में 0.96 प्रतिशत और निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 0.76 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। साथ ही निफ्टी इन्फ्रा 0.28 प्रतिशत, निफ्टी सर्विसेज 0.09 प्रतिशत और निफ्टी कंजप्शन इंडेक्स 0.04 प्रतिशत चढ़कर बंद होने में सफल रहे।

सेंसेक्स की प्रमुख कंपनियों में भारती एयरटेल, अदाणी पोर्ट्स, आईसीआईसीआई बैंक, टाइटन, महिंद्रा एंड महिंद्रा (एमएंडएम), एचडीएफसी बैंक और इटरनल बढ़त बनाने वाले शेयरों में शामिल रहे। इसके विपरीत एशियन पेंट्स, इंडिगो, एनटीपीसी, पावर ग्रिड, भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा, सन फार्मा, टाटा स्टील, ट्रेंट, आईटीसी, एक्सिस बैंक और टीसीएस के शेयरों में गिरावट देखी गई।

बड़ी कंपनियों के साथ-साथ व्यापक बाजार में भी दबाव साफ दिखाई दिया। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 339.40 अंक (0.53 प्रतिशत) टूटकर 63,782.15 पर और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 136.55 अंक (0.69 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ 19,738.55 पर आ गया।

बाजार जानकारों के अनुसार, कंपनियों के तिमाही नतीजों और घरेलू आर्थिक परिस्थितियों के चलते चुनिंदा शेयरों पर आधारित ‘बॉटम-अप’ निवेश रणनीति के बेहतर अवसर बन रहे हैं। इसके साथ ही भारत की 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में आई गिरावट और विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की क्रमिक वापसी से घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत सहारा मिल रहा है।

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