केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार देश के सीमांत क्षेत्रों के समग्र विकास और रणनीतिक संपर्क को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि अतीत में जिन सीमावर्ती क्षेत्रों की अनदेखी की गई थी, वहां अब बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने का कार्य तीव्र गति से जारी है।
अरुणाचल प्रदेश के सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सीमाई क्षेत्रों माजा, गालेमो और तक्सिंग का जमीनी मुआयना करने के बाद किरेन रिजिजू ने एक वीडियो साझा किया। इस वीडियो में कठिन हिमालयी परिस्थितियों के बीच भारी मशीनों से हो रहे निर्माण कार्य और जवानों व स्थानीय निवासियों के साथ मंत्री का संवाद सामने आया। रिजिजू ने कहा कि सीमा संबंधी मामलों पर गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी के विपरीत सरकार वास्तविक धरातल पर निर्माण कार्य पूरा करने पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा चीनी अतिक्रमण के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए रिजिजू ने कहा कि इस विषय को भारत-चीन सीमा के अनिर्धारित होने के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। अरुणाचल प्रदेश में दोनों देशों के बीच एक लंबी सीमा है, जहां कोई औपचारिक सीमांकन या सीमा स्तंभ मौजूद नहीं हैं। उन्होंने कहा कि स्पष्ट सीमा न होने से ग्रामीणों की चिंताएं जायज हैं, परंतु असत्यापित दावों और भ्रामक वीडियो के जरिए जनमानस में गलत धारणा बनाना उचित नहीं है।
अतीत की रक्षा नीतियों पर निशाना साधते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस के शासनकाल में तत्कालीन रक्षा मंत्री ए.के. एंटनी ने संसद में स्वीकार किया था कि भारत सीमा पर सड़कें न बनाने की नीति अपना रहा था, जबकि चीन निरंतर अपना ढांचा मजबूत कर रहा था। 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस दृष्टिकोण को बदला। वर्ष 1947 के बाद पहली बार अंतिम सीमा बिंदु पर बसे ‘माजा’ गांव तक सड़क का निर्माण हुआ और 2019 में ‘तक्सिंग’ तक भी पक्की सड़क पहुंचाई गई।
चीन द्वारा भारतीय गांवों पर कब्जा करने की बातों को खारिज करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि विवाद उन क्षेत्रों में है जहां सीमांकन स्पष्ट नहीं है। लोंगजू से आगे घाटी में बने चीनी ढांचों के संबंध में उन्होंने रेखांकित किया कि वह क्षेत्र 1959 और 1962 से ही चीन के नियंत्रण में रहा है। उन्होंने बताया कि संवेदनशील क्षेत्रों में भारतीय सेना व भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की निगरानी बढ़ाई गई है तथा ‘रीढ़ की पहाड़ी’ पर होने वाली गतिविधियों पर गंभीरता से नजर रखी जा रही है। उन्होंने अपील की कि झूठे वीडियो के जरिए सेना के मनोबल को ठेस पहुंचाने वाले राजनीतिक विमर्श से दूर रहा जाए।