चिकित्सा प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ की आयोजन व्यवस्था में सुधार को लेकर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को केंद्र सरकार को राधाकृष्णन समिति और नंदन नीलेकणि कार्य बल की सिफारिशों पर उठाए गए कदमों की रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा। न्यायालय ने शिक्षा मंत्रालय के सचिव को निर्देश दिया है कि वह इन सिफारिशों को लागू करने की संभावित समय-सीमा बताते हुए तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत हलफनामा दाखिल करें।
न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति अलोक अराधे की खंडपीठ ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के कामकाज में आवश्यक सुधारों को संस्थागत स्वरूप दिया जाना अनिवार्य है। पीठ ने रेखांकित किया कि कागजों पर पूरी प्रक्रिया आदर्श दिखाई देती है, किंतु एक परीक्षा से दूसरी परीक्षा के अंतराल में परिस्थितियां काफी बदल जाती हैं। ऐसे में परीक्षाओं का पारदर्शी और सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए एनटीए को पर्याप्त मानव संसाधन, मजबूत बुनियादी ढांचे और तकनीकी क्षमताओं से लैस किया जाना चाहिए।
नीट-यूजी में पर्चा लीक की घटनाओं के उपरांत शिक्षा मंत्रालय ने परीक्षा सुधार, डेटा सुरक्षा मानकों को बेहतर करने और एनटीए की कार्यप्रणाली में बदलाव की सिफारिश के लिए सात सदस्यीय राधाकृष्णन समिति का गठन किया था। वहीं, व्यापक संरचनात्मक सुधारों के लिए इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय टास्क फोर्स बनाई गई थी। अदालत ने पाया कि समिति ने परीक्षा की सुरक्षा और विश्वसनीयता को मजबूत करने के लिए ब्लॉकचेन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों के समावेश की सिफारिश की है।
सुनवाई के दौरान मेहता ने शीर्ष अदालत को वर्तमान सुरक्षा तंत्र का ब्योरा दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि नीट परीक्षा की मौजूदा व्यवस्था अभेद्य है। किसी एक व्यक्ति के स्तर पर अंतिम 100 प्रश्नों का निर्धारण न हो, इसके लिए विभिन्न विशेषज्ञों से 500 प्रश्नों का प्रश्न बैंक तैयार कराया जाता है। इसके अलावा, चिन्हित प्रिंटिंग प्रेसों में सीसीटीवी और सीआईएसएफ के कड़े पहरे में छपाई, जीपीएस से लैस वाहनों और पुलिस सुरक्षा में परिवहन तथा बैंकों के स्ट्रॉन्ग रूम में भंडारण जैसी सावधानियां बरती जाती हैं। परीक्षा के दिन तय सुरक्षा मानकों और वीडियोग्राफी के बीच अधिकारियों व परीक्षार्थियों के समक्ष प्रश्नपत्र खोला जाता है।
अदालत ने कहा कि समिति इन सुरक्षा उपायों पर पहले ही विचार कर चुकी है, लेकिन प्राथमिक आवश्यकता एनटीए को एक आत्मनिर्भर और मजबूत संस्थान बनाने की है। पीठ ने आगाह किया कि संस्थागत ढांचे के अभाव में अनुभवी अधिकारियों के तबादले से व्यवस्था का नुकसान होता है। यूपीएससी की कार्यप्रणाली का दृष्टांत देते हुए पीठ ने कहा कि उस संस्था ने क्रमिक रूप से परीक्षाएं आयोजित करते हुए अपनी संस्थागत दक्षता हासिल की है; इसी तर्ज पर परीक्षा आयोजित करने वाली संस्थाओं को भी खुद को समय के साथ अधिक सक्षम और परिपक्व बनाना चाहिए।
यह सुनवाई अधिवक्ता तन्वी दुबे के माध्यम से ‘फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन’ व अन्य द्वारा दायर याचिकाओं पर चल रही थी। इन याचिकाओं में एनटीए के स्थान पर किसी सशक्त स्वायत्त संस्था की स्थापना या एजेंसी के पुनर्गठन की मांग की गई है। वर्तमान में पेपर लीक के आरोपों की जांच सीबीआई कर रही है। गौरतलब है कि वर्ष 2024 के नीट-यूजी मामले में शीर्ष अदालत ने परीक्षा रद्द करने की मांग अस्वीकार कर दी थी, लेकिन पेपर लीक से निपटने के लिए कड़े दिशा-निर्देश और परीक्षा निरस्तीकरण के कानूनी मानक तय किए थे।