सात दिनों की गिरावट के बाद संभला शेयर बाजार, सेंसेक्स 628 अंक उछला, निफ्टी 24,230 के पार

सात दिनों की गिरावट के बाद संभला शेयर बाजार, सेंसेक्स 628 अंक उछला, निफ्टी 24,230 के पार

भारतीय शेयर बाजार में पिछले सात कारोबारी सत्रों से जारी गिरावट के सिलसिले पर गुरुवार को विराम लग गया। दिनभर की लिवाली के दम पर प्रमुख बेंचमार्क सूचकांक सेंसेक्स 628.04 अंक यानी 0.82 प्रतिशत की बढ़त दर्ज करते हुए 77,537.72 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 153.55 अंक (0.64 प्रतिशत) चढ़कर 24,231.85 के स्तर पर पहुंचा।

बाजार की इस रिकवरी में मीडिया, रियल्टी और निजी बैंकों के शेयरों ने सबसे अहम भूमिका निभाई। सेक्टोरल सूचकांकों में निफ्टी मीडिया 2.13 प्रतिशत, निफ्टी रियल्टी 1.41 प्रतिशत और निफ्टी प्राइवेट बैंक 0.89 प्रतिशत की मजबूती के साथ बढ़त में सबसे आगे रहे। इसके अतिरिक्त एफएमसीजी, आईटी, फाइनेंशियल सर्विसेज, सर्विसेज, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और इन्फ्रास्ट्रक्चर इंडेक्स भी लाभ के साथ बंद हुए। हालांकि, रक्षा क्षेत्र (निफ्टी इंडिया डिफेंस), पीएसई और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (निफ्टी पीएसयू बैंक) में दबाव रहा और ये लाल निशान पर बंद हुए।

प्रमुख सूचकांकों के साथ ही व्यापक बाजार (ब्रॉडर मार्केट) में भी निवेशकों ने खरीदारी की। मिडकैप और स्मॉलकैप दोनों ही सेगमेंट मजबूती के साथ बंद हुए। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 262.80 अंक (0.41 प्रतिशत) की तेजी के साथ 63,671.55 पर पहुंच गया, वहीं निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 134.30 अंक यानी 0.68 प्रतिशत चढ़कर 19,841.45 के स्तर पर बंद हुआ।

सेंसेक्स में शामिल कंपनियों में इटरनल, कोटक महिंद्रा बैंक, आईटीसी, बजाज फाइनेंस, एक्सिस बैंक, इन्फोसिस, अल्ट्राटेक सीमेंट, पावर ग्रिड, एलएंडटी, एचयूएल, एनटीपीसी, भारती एयरटेल, एचडीएफसी बैंक और एमएंडएम प्रमुख लाभ कमाने वाले शेयरों में शामिल रहे। दूसरी ओर, टाटा स्टील, इंडिगो, एचसीएल टेक और टाइटन के शेयरों में बिकवाली दर्ज की गई और वे नुकसान के साथ बंद हुए।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि बॉन्ड यील्ड की वृद्धि को नियंत्रित करने के उद्देश्य से अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा किए गए हस्तक्षेप ने निवेशकों की धारणा को राहत दी। इससे घरेलू शेयर बाजार को हफ्ते भर से चली आ रही गिरावट से उबरने में मदद मिली। मुख्य रूप से आईटी और वित्तीय शेयरों में आई तेजी ने बाजार को सहारा दिया, क्योंकि यील्ड घटने से खर्च और निवेश को प्रोत्साहन मिलता है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों का ऊंचे स्तर पर बने रहना मुद्रास्फीति को लेकर अब भी चिंता का विषय बना हुआ है।

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