केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने सिंगापुर और आसियान क्षेत्र में भारतीय कृषि एवं खाद्य उत्पादों के निर्यात विस्तार, संस्थागत तालमेल और मानव संसाधन विकास पर विशेष बल दिया है। इसके साथ ही सिंगापुर के खुदरा बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच को और अधिक मजबूत करने के उपायों पर भी गहन विचार-विमर्श किया गया।
दौरे के दौरान भारतीय मंत्रियों और प्रतिनिधिमंडल ने सिंगापुर के वरिष्ठ नेतृत्व तथा अपने समकक्षों के साथ उच्चस्तरीय बैठकें कीं। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कौशल विकास केंद्रों और ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ का दौरा कर दोनों देशों के बीच प्रतिभा संवर्धन और तकनीकी समन्वय को प्रगाढ़ करने के उपायों पर चर्चा की।
द्विपक्षीय वाणिज्यिक संबंधों को गति देने के उद्देश्य से मंत्रियों ने प्रमुख वैश्विक वित्तीय एवं औद्योगिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। इनमें ग्लोबल फाइनेंस एंड टेक्नोलॉजी नेटवर्क, वाईपीओ ग्लोबल, मिल्केन इंस्टीट्यूट, केपेल इंफ्रास्ट्रक्चर, टेमासेक होल्डिंग्स और आईएचएच हेल्थकेयर शामिल रहे। इसके अतिरिक्त, प्रमुख निवेशक परिवारों के प्रतिनिधियों के साथ एक विशेष सत्र आयोजित कर पूंजी निवेश और कारोबारी संभावनाओं पर विस्तृत संवाद हुआ।
कृषि-खाद्य निर्यात को बढ़ावा देने के लिए एपीडा (APEDA) और फेयरप्राइस (FairPrice) की संयुक्त भागीदारी में सिटी स्क्वायर मॉल में भारतीय उत्पादों की एक विशेष प्रदर्शनी आयोजित की जा रही है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य सिंगापुर के स्थानीय खुदरा बाजारों में भारतीय खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और उपस्थिति को और अधिक सुदृढ़ बनाना है।
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में 19.8 अरब डॉलर के प्रवाह के साथ सिंगापुर भारत के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का सबसे बड़ा स्रोत बनकर उभरा है। इसके साथ ही अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच सिंगापुर से भारत में आने वाला संचयी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 194.68 अरब डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। वहीं, दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार भी पिछले दो दशकों में उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है, जो वित्त वर्ष 2004-05 के 6.7 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 36.1 अरब डॉलर दर्ज किया गया।