मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को भोपाल में आयोजित अभिनंदन समारोह में वन विभाग के पदोन्नत कर्मियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्राकृतिक धरोहर और वन्य संपदा की हिफाजत में वन अमले की भूमिका अग्रणी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुशासन के संकल्प को दोहराते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि पदोन्नति प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद अब विभाग की सभी रिक्तियों को नई भर्ती के माध्यम से भरा जाएगा।
विभाग में वर्षों के इंतजार के बाद 4,506 अधिकारियों और कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिला है। इनमें 188 सहायक वन संरक्षक, 2,821 वनपाल, 761 उप वन क्षेत्रपाल और 736 अन्य संवर्गों के कर्मी शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने जानकारी दी कि वन विभाग के 25,389 स्वीकृत पदों के मुकाबले इस समय 18 हजार से अधिक पदस्थ हैं। प्रबंधन को अत्याधुनिक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए नए पदों को भरने की कवायद शुरू कर दी गई है।
मुख्यमंत्री ने वनकर्मियों को ‘ग्रीन सोल्जर्स’ और ‘प्रकृति पुत्र’ की संज्ञा देते हुए कहा कि इनके पुरुषार्थ से मध्यप्रदेश वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में देश का शीर्ष राज्य बना है। प्रदेश की पहचान टाइगर, लेपर्ड, घड़ियाल, वल्चर और चीता स्टेट के रूप में स्थापित हुई है तथा जंगलों में जंगली भैंसों का भी आगमन हुआ है। उन्होंने कहा कि नदियों के मायके के रूप में विख्यात मध्यप्रदेश की जलराशि अक्षुण्ण है और वास्तविक विकास वही है जिसमें प्रकृति और जैव-विविधता दोनों सुरक्षित रहें।
विभागीय प्रगति का विवरण देते हुए प्रमुख सचिव वन, राघवेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि 30.72 फीसदी वन क्षेत्र, 9 टाइगर रिजर्व और 26 वन्यजीव अभयारण्यों के कारण प्रदेश ‘लंग्स ऑफ इंडिया’ कहलाता है। उन्होंने चीता प्रोजेक्ट, हाथियों की ट्रैकिंग हेतु ‘गजरक्षक’ एआई तकनीक, पीएम गतिशक्ति मानचित्र, 43 जिलों में 94 वन वाटिकाओं की मंजूरी और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में 5.62 करोड़ से अधिक पौधों के रोपण की प्रगति साझा की।
पदोन्नत कार्मिकों की ओर से रजनीश शुक्ला, दिनेश नागर, सीमा राजगौंड, कल्पना गौड़ और रामदास सोलंकी ने रक्षाबंधन पर्व से पूर्व पदोन्नति का उपहार देने के लिए आभार प्रकट किया। कार्यक्रम में मध्यप्रदेश राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष रामनिवास रावत, वन बल प्रमुख शुभरंजन सेन तथा अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक अजय यादव सहित वन विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।