सोमवार को भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारतीय शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुए। ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की जब्ती और नौवहन नियमों में बदलाव की चेतावनी के बाद दलाल स्ट्रीट पर निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई, जिसका सीधा असर प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा।
कारोबारी सत्र के अंत में 30 शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स 171.72 अंक यानी 0.22 प्रतिशत टूटकर 77,369.11 के स्तर पर बंद हुआ। इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 50 भी 32.95 अंक यानी 0.14 प्रतिशत की सुस्ती के साथ 24,219.05 पर आ गया।
बाजार में यह नरमी रणनीतिक रूप से संवेदनशील हॉर्मुज जलडमरूमध्य क्षेत्र में बढ़ते संकट और ईरान के खिलाफ संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों की घोषणा से पहले निवेशकों की सतर्कता को दर्शाती है। यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊर्जा आपूर्ति की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
कारोबार के दौरान कई दिग्गज कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव साफ तौर पर देखा गया। निफ्टी पैक में प्रमुख रूप से एसबीआई लाइफ इंश्योरेंस कंपनी (SBI Life Insurance Company), स्पेशल इकोनॉमिक ज़ोन (Special Economic Zone) और बजाज फाइनेंस (Bajaj Finance) के शेयरों में सर्वाधिक गिरावट दर्ज की गई।
क्षेत्रीय सूचकांकों की बात करें तो निफ्टी पीएसयू बैंक इंडेक्स में सबसे बड़ी गिरावट देखने को मिली, जिससे सरकारी बैंकिंग शेयरों पर दबाव स्पष्ट नजर आया। इसके विपरीत, निफ्टी मेटल ने अन्य सभी सेक्टोरल इंडेक्स की तुलना में बेहतर मजबूती दिखाई और बाजार को सहारा देने का कार्य किया।
व्यापक बाजार में रुझान मिला-जुला रहा, जहां निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.13 प्रतिशत की बढ़त हासिल करने में कामयाब रहा, वहीं निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स में 0.26 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज हुई। कमजोर एशियाई संकेतों के बीच भारतीय बाजार पूरे दिन धीरे-धीरे फिसलते रहे, जिसमें बड़ी कंपनियों का प्रदर्शन व्यापक बाजार की तुलना में अधिक कमजोर रहा।