आगामी 2029 के आम चुनावों को ध्यान में रखते हुए निर्वाचन आयोग ने नई पीढ़ी के युवाओं—’जेनरेशन जी’ और ‘जेन अल्फा’—को लोकतांत्रिक व्यवस्था से जोड़ने के लिए एक नया राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य स्कूली और उच्च शिक्षण संस्थानों के विद्यार्थियों को जागरूक मतदाता बनाने के साथ-साथ भविष्य के चुनावी साक्षरता अभियानों का नेतृत्व करने में सक्षम बनाना है।
आयोग इस अभियान को देश के सभी 4,123 विधानसभा क्षेत्रों में संचालित करेगा। इसके दायरे में 9वीं से 12वीं कक्षा के स्कूली विद्यार्थियों सहित कॉलेज और विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राएं शामिल होंगे। आयोग के आंकड़ों के अनुसार, देश में 18 से 26 वर्ष आयु वर्ग के करीब 14.78 करोड़ युवा हैं, जिनमें 7.98 करोड़ पुरुष, 6.79 करोड़ महिलाएं और लगभग 9,000 तृतीय लिंग के नागरिक शामिल हैं। आयोग का प्राथमिक लक्ष्य इस बड़े युवा वर्ग को चुनावी प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक मूल्यों से जोड़ना है।
जमीनी स्तर पर पहुंच मजबूत करने के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 10 के औसत से कुल 50,000 ‘निर्वाचन साक्षरता क्लब’ (ईएलसी) स्थापित करने की रूपरेखा तैयार की गई है। इसके अतिरिक्त, अभियान के अंतर्गत लगभग 15 लाख स्कूलों, 70,000 कॉलेजों और 1,400 विश्वविद्यालयों तक सीधा संपर्क साधा जाएगा, जिससे इन सभी शिक्षण संस्थानों को चुनावी साक्षरता के प्रभावी केंद्रों के रूप में विकसित किया जा सके।
उल्लेखनीय है कि निर्वाचन साक्षरता क्लबों की शुरुआत वर्ष 2018 में ‘व्यवस्थित मतदाता शिक्षा एवं चुनावी भागीदारी’ (स्वीप) कार्यक्रम के तहत की गई थी, ताकि छात्रों को आयोग की कार्यप्रणाली और लोकतांत्रिक सिद्धांतों की समझ दी जा सके। वर्तमान में संचार तंत्र में आए बदलावों और डिजिटल मंचों की उपयोगिता को देखते हुए अब इसे ‘ईएलसी 2.0’ के रूप में उन्नत किया गया है, जो एक डिजिटल और लगातार सक्रिय रहने वाले मंच के रूप में कार्य करेगा।
आयोग का मानना है कि युवा मतदाताओं के साथ प्रत्यक्ष और व्यवस्थित संवाद बनाए रखना आवश्यक है। नए अभियान के माध्यम से युवाओं को केवल एक सामान्य मतदाता बनाने के बजाय, उन्हें लोकतांत्रिक सहभागिता और जागरूकता अभियानों में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के लिए तैयार किया जाएगा।