समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और नीली अर्थव्यवस्था के विकास के लिए भारत-सेशेल्स में उच्चस्तरीय वार्ता

समुद्री संसाधनों के सतत उपयोग और नीली अर्थव्यवस्था के विकास के लिए भारत-सेशेल्स में उच्चस्तरीय वार्ता

मत्स्य पालन और नीली अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में आपसी सहयोग को विस्तार देने के उद्देश्य से 25 अगस्त को भारत सरकार के मत्स्य पालन विभाग और सेशेल्स गणराज्य के उच्चस्तरीय दल के मध्य एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई।

मत्स्य पालन विभाग के सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी और सेशेल्स के मत्स्य पालन, कृषि व नीली अर्थव्यवस्था मंत्री वालेस कॉसग्रो के नेतृत्व में आयोजित इस वार्ता में सहयोग के नए क्षेत्रों की पहचान की गई। बैठक का मुख्य केंद्र समुद्री संपदा के विवेकपूर्ण दोहन के लिए एक साझा रोडमैप तैयार करना और तकनीकी साझेदारी को नई दिशा देना रहा।

वार्ता के दौरान हिंद महासागर क्षेत्र की स्थिरता और पोषण सुरक्षा के लिए दोनों देशों के जुड़ाव को अहम बताया गया। भारतीय पक्ष ने मत्स्य क्षेत्र को आर्थिक विकास का संवाहक बताते हुए रेखांकित किया कि देश में कुल मत्स्य उत्पादन 19.7 मिलियन टन के ऐतिहासिक स्तर पर पहुंच गया है, जबकि सी-फूड निर्यात 8.46 अरब डॉलर दर्ज किया गया है। भारत ने जिम्मेदार मत्स्यन और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से जुड़े प्रयासों को भी साझा किया।

दोनों प्रतिनिधिमंडलों ने आधुनिक हैचरी निर्माण, समुद्री जलीय कृषि, टूना मत्स्यन की तकनीकों में सुधार और स्टॉक असेसमेंट के लिए संयुक्त प्रयास करने पर सहमति जताई। इसके साथ ही मत्स्य मूल्य श्रृंखला के विकास, टूना प्रसंस्करण, अपशिष्ट प्रबंधन और निगरानी तंत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) व डिजिटल प्रणालियों के समावेश पर गंभीर मंथन हुआ।

संस्थागत समन्वय को मजबूत करने के लिए एक वार्षिक कार्य-योजना तैयार करने, प्रयोगशालाओं तक साझा पहुंच बनाने और संयुक्त वैज्ञानिक अनुसंधान को व्यावहारिक रूप देने का निर्णय लिया गया। सेशेल्स पक्ष ने द्विपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) के माध्यम से दोनों देशों के शोधकर्ताओं, तकनीकी विशेषज्ञों और शैक्षणिक संस्थानों के बीच निरंतर संवाद व्यवस्था स्थापित करने पर बल दिया। बैठक का समापन समुद्री समृद्धि के साझा लक्ष्यों को धरातल पर उतारने की प्रतिबद्धता के साथ हुआ।

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