केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने सोमवार को ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना की औपचारिक रूपरेखा जारी कर दी है। केंद्रीय कैबिनेट द्वारा 1.27 लाख करोड़ रुपये के कुल बजट से स्वीकृत यह कार्यक्रम सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन के 6 प्रमुख स्तंभों और 10 श्रेणियों को कवर करता है। देश में सेमीकंडक्टर उद्योग को गति देने के लिए तैयार की गई इस नीति में विभिन्न श्रेणियों के लिए निवेश, राजस्व और तकनीकी योग्यता के कड़े मानदंड तय किए गए हैं।
योजना के तहत सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग को विशेष प्राथमिकता दी गई है। रणनीतिक परियोजनाओं में पूर्ण स्वामित्व व परिचालन नियंत्रण केवल भारतीय नागरिकों के पास होना अनिवार्य है, जबकि वाणिज्यिक डिजाइन में ओसीआई कार्डधारकों को भी नियंत्रण की अनुमति दी गई है। स्टार्टअप्स और छोटी इकाइयों को प्रोत्साहित करने के लिए 15 करोड़ रुपये या लागत का 50 फीसदी तक माइलस्टोन-लिंक्ड सीड फंड मिलेगा। इसके साथ ही नए लॉन्च किए गए चिप्स व आईपी पर 5 साल के लिए 9 फीसदी की बिक्री प्रतिपूर्ति (प्रति कंपनी 120 करोड़ रुपये तक) और बड़ी पात्र कंपनियों के लिए 5 फीसदी रॉयल्टी फाइनेंसिंग की व्यवस्था की गई है, जिसकी वसूली सरकारी अनुदान के 1.5 गुना होने तक जारी रहेगी।
विनिर्माण क्षेत्र में सिलिकॉन वेफर फैब्रिकेशन इकाइयों के लिए न्यूनतम 20,000 करोड़ रुपये का निवेश और 40,000 वेफर प्रतिमाह (300-एमएम) की उत्पादन क्षमता आवश्यक होगी। साथ ही, आवेदक कंपनी का पिछले तीन वित्तीय वर्षों में से कम से कम एक वर्ष में 7,500 करोड़ रुपये का कारोबार होना जरूरी है। इन विशाल प्लांट्स को सरकार की तरफ से 40 प्रतिशत पूंजीगत सहायता समानुपातिक (पारी-पासु) आधार पर दी जाएगी।
स्पेशलाइज्ड फैब्स जैसे कंपाउंड सेमीकंडक्टर, सेंसर और फोटोनिक्स के लिए 500 करोड़ रुपये के निवेश पर 35 प्रतिशत वित्तीय सहायता तय की गई है। पैकेजिंग क्षेत्र में 1,000 करोड़ रुपये के निवेश वाली एडवांस्ड पैकेजिंग परियोजनाओं को 35 प्रतिशत और पारंपरिक पैकेजिंग को 25 प्रतिशत कैपेक्स समर्थन मिलेगा। इसके अतिरिक्त उपकरण व कलपुर्जा निर्माण इकाइयों को 30 प्रतिशत सहायता के साथ-साथ वित्त वर्ष 2028-29 से पांच वर्षों के लिए स्थानीय खरीद पर 2 से 10 प्रतिशत तक का पीएलआई प्रोत्साहन भी मिलेगा।
नीति में उन्नत अनुसंधान एवं विकास (R&D) पर विशेष बल दिया गया है, जिसके तहत सरकार पात्र पूंजीगत और परिचालन खर्च सहित कुल परियोजना लागत का 75 प्रतिशत तक वित्तीय भार उठाएगी। पूरी चयन और मूल्यांकन प्रक्रिया का संचालन इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) द्वारा तकनीकी विशेषज्ञता, ऑफ-टेक और संचालन क्षमता के आधार पर किया जाएगा। यह पूरी योजना शुरुआती तौर पर कंपनियों के आवेदनों के लिए तीन साल की अवधि तक खुली रहेगी।