बेहतर जीडीपी आंकड़ों के बाद भी सुस्त शुरुआत: वैश्विक संकेतों और क्रूड में तेजी से सेंसेक्स 76,862 पर फिसला

बेहतर जीडीपी आंकड़ों के बाद भी सुस्त शुरुआत: वैश्विक संकेतों और क्रूड में तेजी से सेंसेक्स 76,862 पर फिसला

मंगलवार को शुरुआती कारोबार में घरेलू शेयर बाजारों पर बिकवाली का दबाव देखा गया। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में देश के मजबूत आर्थिक प्रदर्शन के बावजूद अंतरराष्ट्रीय बाजारों की मंदी, चढ़ती अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने निवेशकों के रुख को सीमित कर दिया।

सत्र की शुरुआत के साथ ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 95.14 अंक (0.12 प्रतिशत) गिरकर 76,862.13 के स्तर पर पहुंच गया। वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख संवेदी सूचकांक निफ्टी 50 भी 21.35 अंक (0.09 प्रतिशत) की कमजोरी के साथ 24,059.05 पर दर्ज किया गया।

उल्लेखनीय है कि चालू वित्त वर्ष की प्रथम तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था ने 7.8 प्रतिशत की उत्साहजनक जीडीपी वृद्धि दर हासिल की है, जो उम्मीदों से अधिक है। इस प्रदर्शन ने देश के बुनियादी आर्थिक ढांचे के प्रति भरोसा तो बढ़ाया है, लेकिन महंगे कच्चे तेल और अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में तेजी के चलते कारोबारी सतर्कता बरत रहे हैं।

अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर एशियाई बाजारों में भी गिरावट का असर दिखा। हांगकांग का हैंग सेंग 1.11 प्रतिशत, सिंगापुर का स्ट्रेट्स टाइम्स 0.71 प्रतिशत और जापान का निक्केई 225 0.21 प्रतिशत लुढ़क गया। इसके उलट ताइवान वेटेड इंडेक्स में 1.50 प्रतिशत, इंडोनेशिया के जकार्ता इंडेक्स में 0.86 प्रतिशत, थाईलैंड के एसईटी में 0.10 प्रतिशत तथा शंघाई कंपोजिट में 0.03 प्रतिशत की मामूली बढ़त दर्ज की गई।

अमेरिका में 10 साल की ट्रेजरी यील्ड 4.77 प्रतिशत और 30 साल की यील्ड 5.24 प्रतिशत के ऊंचे स्तर पर बनी हुई है, जिससे इक्विटी बाजार से पूंजी सुरक्षित अमेरिकी सरकारी प्रतिभूतियों में स्थानांतरित होने की आशंका है। इसके साथ ही पिछले अमेरिकी सत्र में एसएंडपी 500 में 0.33 प्रतिशत व नैस्डैक में 0.12 प्रतिशत का नुकसान रहा, जबकि डॉव जोन्स फ्यूचर्स 0.12 प्रतिशत की तेजी पर कारोबार कर रहा था।

कच्चे तेल की कीमतों में उछाल भी घरेलू बाजार के लिए प्रतिकूल बना हुआ है। रिपोर्ट के समय ब्रेंट क्रूड 0.73 प्रतिशत की बढ़त के साथ 91.15 डॉलर प्रति बैरल और डब्ल्यूटीआई क्रूड 1.03 प्रतिशत बढ़कर 86.64 डॉलर प्रति बैरल पर दर्ज हुआ। ऐसे में पहली तिमाही के 7.8 प्रतिशत जीडीपी आंकड़े अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के बावजूद, कच्चे तेल की ऊंची दरें, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और वैश्विक अनिश्चितता निकट भविष्य में बाजार की रफ्तार को सीमित कर सकती हैं।

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