अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि ईरान के साथ अमेरिका का मौजूदा गतिरोध किसी पारंपरिक युद्ध के दायरे में नहीं आता, बल्कि यह एक रुक-रुक कर चलने वाला सीमित सैन्य टकराव है। संवाददाताओं से चर्चा करते हुए उन्होंने उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के उस बयान का बचाव किया, जिसमें दोबारा हमले शुरू होने के बाद भी इसे युद्ध कहने से मना किया गया था। ट्रंप ने जोर देकर कहा कि अमेरिकी अभियानों ने तेहरान के परमाणु हथियार बनाने के मंसूबों पर पूरी तरह विराम लगा दिया है।
सैनिकों के हताहत होने के सवाल पर ट्रंप ने अपने पांच महीने के सैन्य अभियान का बचाव किया। उन्होंने कहा कि 18 अमेरिकी सैनिकों की शहादत बेहद गंभीर बात है, लेकिन इसकी तुलना वियतनाम या अफगानिस्तान के दशकों लंबे युद्धों से नहीं की जा सकती। उन्होंने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान में दोनों देशों के बीच कोई लगातार जंग जारी नहीं है, बल्कि अमेरिका समय-समय पर जरूरी सैन्य कार्रवाई करता है।
भविष्य के हमलों का संकेत देते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने चेतावनी दी कि ईरान में ‘पिकएक्स’ नामक ठिकाने पर यदि कोई भी संदिग्ध गतिविधि देखी गई, तो वहां तत्काल सैन्य प्रहार किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि ईरान के भीतर होने वाले हर घटनाक्रम की सख्त निगरानी की जा रही है और तेहरान द्वारा किसी भी प्रकार की गड़बड़ी किए जाने पर अमेरिकी सेना द्वारा अत्यंत कड़ा जवाब दिया जाएगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिकी प्रभुत्व का दावा करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वहां ईरानी सेना के निगरानी तंत्र, रडार और विमानों को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है। साथ ही जलमार्ग में बिछाई गई समुद्री सुरंगों को साफ करने के बाद तेल के टैंकरों का आवागमन सुरक्षित बना दिया गया है। ट्रंप ने कहा कि जिस तरह वेनेजुएला पर नियंत्रण हासिल किया गया, उसी प्रकार अब ईरान पर भी प्रभावी पकड़ बना ली गई है।
ट्रंप ने बताया कि हाल के हमलों के पश्चात पिछले कई दिनों से किसी भी तरह की गोलीबारी दर्ज नहीं की गई है। उनका मानना है कि यदि अमेरिका अपना अभियान तुरंत समाप्त भी कर दे, तो भी ईरान को इस क्षति से उबरने में करीब ढाई दशक का समय लगेगा। अभियान समाप्ति की अवधि बताए बिना उन्होंने कहा कि वे इस मसले को निपटाना चाहते हैं ताकि अगले राष्ट्रपति को इस उलझन का सामना न करना पड़े।
अंतरराष्ट्रीय पहलुओं पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत तौर पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से आग्रह किया था कि वे इस टकराव में शामिल न हों, और बीजिंग वास्तव में इससे काफी हद तक दूर है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि यद्यपि चीन की तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग पर निर्भर रहा है, लेकिन सीरिया से गुजरने वाले मार्गों और मध्य पूर्व में बन रही नई पाइपलाइनों के चलते अब होर्मुज जलडमरूमध्य की सामरिक निर्भरता पूर्व की भांति नहीं रह गई है।