भगवान श्रीकृष्ण का पावन जन्मोत्सव शुक्रवार को देश और विदेश में पूरी श्रद्धा व गरिमा के साथ आयोजित किया गया। मध्यरात्रि के ठीक 12 बजते ही ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष के साथ मंदिरों में कान्हा के अवतरण की विशेष पूजा-अर्चना और आरती शुरू हुई। श्रीकृष्ण की नगरी मथुरा से लेकर दिल्ली-एनसीआर, द्वारका और बेंगलुरु तक सभी प्रमुख क्षेत्रों में जन्मोत्सव की व्यापक रौनक देखने को मिली।
उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मभूमि पर इस अवसर पर आस्था का विराट दृश्य सामने आया। शुक्रवार की सुबह से ही देश के कोने-कोने से पहुंचे श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। रात के मुख्य पूजन और उसके बाद संपन्न हुई मंगला आरती के उपरांत पूरा मंदिर परिसर भक्ति भाव में डूब गया। ढोल, ताशे और नगाड़ों की थाप पर भक्त झूमते दिखाई दिए, जिससे पूरा वातावरण कन्हैया के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।
बड़ी संख्या में उपस्थित जनसैलाब को नियंत्रित रखने और सुरक्षा बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन ने व्यापक स्तर पर व्यवस्थाएं की थीं। पुख्ता सुरक्षा प्रबंधों और सुगम व्यवस्था के कारण दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं को बिना किसी व्यवधान के दर्शन का अवसर प्राप्त हुआ।
मंदिर दर्शन के लिए पहुंचीं एक महिला श्रद्धालु ने बताया कि संसार की संपूर्ण व्यवस्था भगवान श्रीकृष्ण की कृपा और लीला पर आधारित है। उन्होंने कहा कि प्रभु की शरण में आने के बाद से ही उनके जीवन में सुखद व चमत्कारी बदलाव हुए हैं। वहीं, पिछले 15 वर्षों से नियमित रूप से मथुरा पहुंच रहे श्रद्धालु मोहन सिंह ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यहां आने से उन्हें अपार आध्यात्मिक आनंद मिलता है और भगवान की भक्ति उन्हें इस उत्सव के रंग में झूमने की प्रेरणा देती है।
मथुरा में ही रहने वाली एक अन्य महिला श्रद्धालु ने बताया कि हालांकि वे नियमित रूप से भगवान के दर्शन करती हैं, लेकिन जन्माष्टमी के मुख्य पर्व पर दर्शन का यह उनका पहला अनुभव था, जो बेहद सुखद रहा। इसके अलावा, पिछले दो दशकों से यहां आ रहीं एक अन्य महिला भक्त ने वर्तमान व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि पहले की तुलना में अब मंदिर में प्रशासनिक सुविधाएं काफी बेहतर हुई हैं, जिससे पर्व के भारी दबाव के बावजूद सुगमता और शांति से दर्शन संभव हो सके।