नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि भारत वर्ष 2013 की तुलना में आज सामाजिक और आर्थिक रूप से कहीं अधिक सुरक्षित और सशक्त है। इस दौरान उन्होंने विपक्ष की कार्यशैली पर कटाक्ष करते हुए पूर्ववर्ती संकटों और वर्तमान भारत के सामर्थ्य की तुलना की।
लाल किले से दिए गए अपने पूर्व स्वतंत्रता दिवस संबोधन का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने आलोचकों के लिए ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का प्रयोग एक तरह की होम्योपैथिक औषधि के रूप में किया था। उन्होंने समझाया कि जिस प्रकार होम्योपैथी उपचार में बीमारी पहले कुछ समय के लिए उभरती है, उसी प्रकार इस टिप्पणी के बाद ऐसे सभी तत्व खुलकर सामने आ गए और देश की जनता अब उनकी वास्तविक मंशा को भली-भांति देख रही है। उन्होंने देश में दो प्रवृत्तियों का जिक्र करते हुए कहा कि एक वर्ग समाज की ऊर्जा को राष्ट्र निर्माण में परिवर्तित करता है, जबकि दूसरा वर्ग हर परिस्थिति में केवल ‘नाराज फूफा’ का रुख अपनाए रहता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस विरोधी वर्ग की पहचान हर परियोजना पर यह पूछने की रही है कि ‘इसकी क्या आवश्यकता है?’ उन्होंने स्पष्ट किया कि चाहे विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा का निर्माण हो, बुलेट ट्रेन परियोजना, डिजिटल लेन-देन के लिए यूपीआई, सेमीकंडक्टर चिप या नए संसद भवन का निर्माण हो—हर अवसर पर इसी प्रकार के प्रश्न उठाए गए। यहां तक कि देश के लिए बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के स्मारक निर्माण पर भी आपत्तियां जताई गईं, किंतु राष्ट्र ने ऐसी नकारात्मक सोच को दृढ़ता से खारिज किया है।
विगत वर्षों की परिस्थितियों की तुलना करते हुए प्रधानमंत्री ने छात्रों को स्मरण कराया कि 2013 की केदारनाथ आपदा ने व्यवस्था को हिला दिया था, जबकि 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट ने भारत के बैंकिंग तंत्र को भारी क्षति पहुंचाई थी। उसी वर्ष मुंबई में हुए आतंकी हमले के समय भी तत्कालीन शासन द्वारा कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया था। उन्होंने बताया कि उनकी सरकार ने भी बीते छह वर्षों के दौरान कोविड महामारी, रूस-यूक्रेन युद्ध और ईरान तनाव जैसी गंभीर अंतरराष्ट्रीय चुनौतियों का सामना किया है। उन्होंने कहा कि जो लोग यह मानकर चल रहे थे कि वे मोदी को दबा देंगे, उन्हें देशवासियों की सामूहिक इच्छाशक्ति के आगे झुकना पड़ा है।
वैश्विक व्यापार का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि बीते एक दशक में भारत ने लगभग 40 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते किए हैं, जिससे भारतीय युवाओं के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए अवसर सृजित हुए हैं। उन्होंने छात्रों से कहा कि कैंपस जीवन की नियमित चर्चाओं और परीक्षाओं से परे एक व्यापक दुनिया है। वर्ष 2013 से पहले युवा स्टार्टअप, यूनिकॉर्न अथवा अंतरिक्ष अनुसंधान से जुड़े उद्यमों की कल्पना भी नहीं करते थे, जबकि आज का युवा इन क्षेत्रों में अग्रणी बन रहा है। उन्होंने सवाल किया कि जब शीर्ष वैश्विक संस्थानों का नेतृत्व भारतीय कर रहे हैं, तो वे संस्थाएं भारतीय क्यों नहीं हो सकतीं? प्रधानमंत्री ने 140 करोड़ नागरिकों के सामर्थ्य के बल पर अनुसंधान केंद्र बनने, देश के अपने अंतरिक्ष स्टेशन की स्थापना और भविष्य में ओलंपिक की सफल मेजबानी का भरोसा जताते हुए आत्मनिर्भर और विकसित भारत के पथ पर एकजुट होकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।