बिहार में गंगा, कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, पुनपुन और घाघरा जैसी प्रमुख नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के चलते निचले इलाकों में बाढ़ का संकट गहरा गया है। जल संसाधन विभाग द्वारा मंगलवार सुबह 6:00 बजे जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य भर में अधिकांश नदियां लाल निशान को पार कर चुकी हैं और विभिन्न स्थानों पर खतरे के स्तर से एक से लगभग तीन मीटर तक ऊपर बह रही हैं।
विभाग के अनुसार, पुनपुन नदी का प्रवाह सबसे अधिक संवेदनशील बना हुआ है। श्रीपालपुर में नदी 53.55 मीटर पर पहुंच गई है, जो उसके 50.60 मीटर के खतरे के निशान से 2.95 मीटर ज्यादा है, और यहां जलस्तर में लगातार वृद्धि दर्ज की जा रही है। इसी प्रकार, खगड़िया में बूढ़ी गंडक का जलस्तर 38.56 मीटर दर्ज किया गया, जो 36.58 मीटर के खतरे के मानक से 1.98 मीटर ऊपर है। यहां भी नदी के स्तर में बढ़ोतरी का रुख देखा जा रहा है।
गंगा नदी भी कई प्रमुख घाटों पर खतरे के स्तर से ऊपर दर्ज की गई है। राजधानी पटना के दीघा घाट में यह खतरे के निशान से 1.09 मीटर ऊपर (51.54 मीटर), गांधी घाट पर 1.71 मीटर ऊपर (50.31 मीटर) और हाथीदह में 1.65 मीटर ऊपर (43.41 मीटर) बह रही है। राहत की बात यह है कि पटना और हाथीदह में पानी घटने का रुझान है। हालांकि, गंगा के निचले बहाव वाले क्षेत्रों में स्थिति इसके उलट है; मुंगेर में जलस्तर 40.08 मीटर (खतरे के निशान से 0.75 मीटर ऊपर), भागलपुर में 34.60 मीटर (0.92 मीटर ऊपर) और कहलगांव में 32.77 मीटर (1.68 मीटर ऊपर) दर्ज हुआ है, जहां पानी लगातार बढ़ रहा है।
उत्तर बिहार की नदियों में भी उफान जारी है। कोसी नदी बलतारा में 35.15 मीटर और कुरसेला में 31.40 मीटर पर बह रही है, जो अपने संबंधित खतरे के स्तर से क्रमशः 1.30 मीटर और 1.40 मीटर अधिक है तथा दोनों ही जगहों पर पानी बढ़ रहा है। गंडक नदी डुमरिया घाट पर 62.75 मीटर (खतरे के निशान से 0.53 मीटर ऊपर) दर्ज की गई है, हालांकि यहां जलस्तर में कमी आई है। इसके अलावा, हाजीपुर में भी गंडक खतरे के निशान से ऊपर है। बागमती नदी मुजफ्फरपुर में 48.93 मीटर पर स्थिर है, जो लाल निशान से 0.25 मीटर ऊपर है, जबकि घाघरा नदी दरौली और गंगपुर सिसवन में खतरे के बिंदु से ऊपर प्रवाहित हो रही है।
इस बीच, प्रमुख बैराजों से पानी के डिस्चार्ज में गिरावट का रुख देखा गया है। आंकड़ों के अनुसार, बीरपुर बैराज से कोसी का डाउनस्ट्रीम डिस्चार्ज 1,77,880 क्यूसेक, वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक का 1,04,400 क्यूसेक और इंद्रपुरी बैराज से सोन नदी का डिस्चार्ज 1,02,574 क्यूसेक दर्ज किया गया है।
नदियों के इस जलप्लावन से राज्य के 13 जिलों के 77 प्रखंडों की 438 ग्राम पंचायतें जलमग्न हैं, जिससे लगभग 29.13 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासनिक स्तर पर प्रभावित क्षेत्रों में राहत व बचाव अभियान को गति दी गई है। सुरक्षित स्थानों पर विस्थापित किए जा रहे नागरिकों के लिए भोजन, शुद्ध पेयजल और आवश्यक राहत सामग्रियों की व्यवस्था की जा रही है। तटबंधों की सतत निगरानी के साथ प्रशासन विशेष रूप से गंगा, कोसी, बूढ़ी गंडक और पुनपुन के जल ग्रहण वाले इलाकों में पूरी तरह मुस्तैद है।