केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सोमवार को पणजी (गोवा) में पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद की 28वीं बैठक का संचालन किया। इस सम्मेलन में गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, दादरा एवं नगर हवेली तथा दमन एवं दीव के प्रशासक प्रफुल पटेल और दोनों स्तरों के कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
बैठक में अमित शाह ने रेखांकित किया कि क्षेत्रीय परिषदों की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव आया है और ये अब राज्यों के आपसी मतभेद सुलझाने के साथ-साथ विकास योजनाओं की सतत निगरानी का माध्यम बन चुकी हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि पश्चिमी क्षेत्र के राज्यों के मध्य अब कोई विवाद नहीं है, जो नदी जल बंटवारे सहित कई मसलों के शांतिपूर्ण समाधान से संभव हुआ। वर्तमान में यह मंच बच्चों में कुपोषण, स्टंटिंग व कम वजन की रोकथाम के साथ-साथ आधार कार्ड के विस्तार और आयुष्मान भारत कार्ड के प्रभावी क्रियान्वयन की सीधी मॉनिटरिंग कर रहा है।
सहकारी संघवाद के सुदृढ़ीकरण पर चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘टीम इंडिया’ सोच के तहत बैठकों की गति बढ़ी है। वर्ष 2004 से 2014 के बीच जहां क्षेत्रीय परिषदों और स्थायी समितियों की महज 25 बैठकें हुई थीं, वहीं 2014 के उपरांत यह संख्या लगभग तीन गुना इजाफे के साथ 71 पर पहुंच गई। इस दौरान उठाए गए कुल 1,893 मुद्दों में से 1,445 का सर्वसम्मत निवारण किया गया।
अमित शाह ने पश्चिमी क्षेत्र को भारतीय अर्थव्यवस्था की धुरी बताते हुए इसे ‘WEST Engine’ नाम दिया, जिसमें W से वेल्थ और फाइनेंस, E से एक्सपोर्ट्स और पोर्ट्स, S से स्टार्टअप्स और सेमीकंडक्टर तथा T से टूरिज्म और ब्लू इकोनॉमी जुड़ा है। उन्होंने तथ्य साझा किए कि महाराष्ट्र 33,872 स्टार्टअप्स के साथ देश में अव्वल है, गुजरात का धोलेरा सेमीकंडक्टर का नया केंद्र बन रहा है और राज्य का मुंद्रा पोर्ट सर्वाधिक कार्गो प्रबंधन करता है, जिसमें दीनदयाल पोर्ट भी अग्रणी है। मुंबई अंतरराष्ट्रीय पूंजी और वित्त की धुरी बन चुकी है, जबकि गोवा 16 प्रतिशत जीएसडीपी योगदान और सालाना एक करोड़ से अधिक सैलानियों (जिनमें 5 लाख विदेशी नागरिक हैं) के साथ पर्यटन में मिसाल है।
गृह मंत्री ने नई न्याय संहिताओं के अनुपालन और ड्रग्स के विरुद्ध अभियान में पश्चिमी राज्यों को आगे रहने को कहा। उन्होंने पैक्स के कंप्यूटरीकरण की प्रगति का उल्लेख करते हुए बताया कि महाराष्ट्र में यह दर 98 प्रतिशत और गुजरात में 92 प्रतिशत है। साथ ही राज्यों से बनास डेयरी के गोबरधन मॉडल को अपनाने की अपील की गई। प्रगति (PRAGATI) तंत्र के जरिए साइबर सुरक्षा की नियमित समीक्षा का जिक्र करते हुए उन्होंने सभी शहरी सहकारी बैंकों को सीएफसीएफआरएस, म्यूलहंटर एआई और आई4सी से संबद्ध करने का निर्देश दिया तथा अगले दो सालों में तटीय सुरक्षा को और सुदृढ़ करने का भरोसा दिया।
अक्षय ऊर्जा में क्षेत्र की महारत को देखते हुए उन्होंने राज्यों से डेटा सेंटर नीति का भरपूर इस्तेमाल करने का आह्वान किया। इसके अतिरिक्त, फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट्स के जरिए दुष्कर्म मामलों की त्वरित जांच, ईआरएसएस-112, खाद्य सुरक्षा नियम, ग्रामीण स्तर पर बैंकिंग विस्तार, रेल परियोजनाएं, पर्यावरण से जुड़ी मंजूरियां, शहरी नियोजन, बिजली ग्रिड सुधार और स्कूली बच्चों की ड्रॉपआउट दर कम करने से जुड़े एजेंडों पर भी ठोस विचार-विमर्श हुआ।