वैश्विक व्यापार में महिला भागीदारी बढ़ाने के लिए साझा ब्रिक्स तंत्र जरूरी: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल

वैश्विक व्यापार में महिला भागीदारी बढ़ाने के लिए साझा ब्रिक्स तंत्र जरूरी: केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल

नई दिल्ली में आयोजित महिला विकास सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने ब्रिक्स राष्ट्रों से अपील की कि वे महिला संचालित उपक्रमों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में व्यापक अवसर देने हेतु साझा रणनीति अपनाएं। उन्होंने रेखांकित किया कि वैश्विक मंच पर उभरने के लिए कारोबारियों को सरल ऋण, पारदर्शी व्यापारिक कायदे और नए बाजारों से सीधा जुड़ाव मिलना बेहद जरूरी है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि नए व्यापारियों के समक्ष पूंजी जुटाने, विश्वसनीय बाजार पाने और जटिल नियमों से निपटने की लगातार चुनौतियां बनी रहती हैं। भारत ने अपने घरेलू तंत्र में बड़े पैमाने पर वित्तीय समावेशन कर इन बाधाओं को दूर किया है। करीब 12 वर्ष पूर्व तक ग्रामीण महिलाएं बैंकिंग प्रणाली, औपचारिक साख और परिसंपत्तियों के मालिकाना हक से काफी दूर थीं। संपत्तियों के पंजीकरण, लगभग 30 करोड़ बैंक खातों के संचालन और संपार्श्विक-मुक्त कर्ज के जरिए इस स्थिति को पूरी तरह बदला गया।

वर्तमान आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि 90 लाख स्वयं सहायता समूहों और सहकारी संगठनों से 10 करोड़ ग्रामीण महिलाएं जुड़ चुकी हैं। इनमें से 3 करोड़ से ज्यादा महिलाएं प्रतिवर्ष 1 लाख रुपये से अधिक की व्यक्तिगत कमाई कर रही हैं। छोटे व्यवसायों को दिए गए 56 करोड़ कर्जों में से 68 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी महिलाओं के नाम रही है। गोयल के अनुसार, विगत एक दशक में महिला कार्यबल भागीदारी करीब 19 फीसदी दर्ज की गई थी, जिसके कौशल और शिक्षा के विस्तार के साथ और तेज गति से बढ़ने की उम्मीद है।

व्यापारिक बाधाओं के निवारण के संदर्भ में उन्होंने जयपुर सहमति के तहत एक एकीकृत ब्रिक्स व्यापार मंच विकसित करने की सलाह दी। इस व्यवस्था के माध्यम से मांग की जानकारियां, ई-चालान, इलेक्ट्रॉनिक बिल ऑफ लैडिंग और सीमा शुल्क विवरण सदस्य देशों में निर्बाध रूप से साझा किए जा सकेंगे। उन्होंने विमेन एडवांसमेंट फंड को व्यावहारिक रूप देने, वर्ष 2030 तक ठोस व्यापारिक लक्ष्य तय करने, तथा बैंकों द्वारा निर्यात चालान पर आधारित ऋण सुविधा उपलब्ध कराने की बात कही।

गोयल ने कहा कि जीईएम पोर्टल की बदौलत देश के सुदूर इलाकों से भी महिला उद्यमी 100 डॉलर मूल्य की सामग्री सीधे शीर्ष सरकारी कार्यालयों को आपूर्ति कर पा रही हैं। इसी तरह, 780 जिलों में ओडीओपी के जरिए स्थानीय वस्तुओं और खान-पान को निर्यात केंद्रों में तब्दील किया जा रहा है। खाड़ी देशों में रह रहे एक करोड़ प्रवासी भारतीयों की जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय कृषि उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग छोटे उत्पादकों और महिलाओं के लिए नए मार्ग प्रशस्त कर सकती है।

व्यापारिक सुगमता को बढ़ाने के लिए उन्होंने कारोबारियों से नियमों की बाधाओं के साथ-साथ उनके व्यावहारिक समाधान सुझाने का भी आग्रह किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय सुस्ती के बावजूद अप्रैल-अगस्त अवधि में भारत के वस्तु निर्यात में 15 फीसदी से अधिक की वृद्धि हुई है, जबकि पहली तिमाही की आर्थिक संवृद्धि दर 7.8 फीसदी रही। 2047 तक देश की अर्थव्यवस्था को 4 ट्रिलियन से 30 ट्रिलियन डॉलर के स्तर तक ले जाने के लक्ष्य में महिला नेतृत्व एक सशक्त आधार बनेगा।

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