घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को सपाट शुरुआत, वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल के दबाव से सेंसेक्स-निफ्टी सुस्त

घरेलू शेयर बाजार में गुरुवार को सपाट शुरुआत, वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल के दबाव से सेंसेक्स-निफ्टी सुस्त

भारतीय शेयर बाजारों में गुरुवार को शुरुआती कारोबार के दौरान सीमित हलचल देखी गई और प्रमुख सूचकांक लगभग स्थिर स्तरों पर खुले। सुबह 9:23 बजे सेंसेक्स 36 अंक (0.05 प्रतिशत) फिसलकर 74,727.96 के स्तर पर दर्ज किया गया, जबकि निफ्टी 8.25 अंक (0.01 प्रतिशत) घटकर 23,430.00 पर कारोबार कर रहा था।

कारोबार के शुरुआती दौर में ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक बिकवाली का रुख देखा गया। ये दोनों प्रमुख सेक्टोरल इंडेक्स गिरावट की सूची में सबसे आगे रहे। इसके अतिरिक्त मैन्युफैक्चरिंग, फार्मास्युटिकल, डिफेंस, कंजप्शन, हेल्थकेयर, रियल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर और मेटल सेक्टर्स के सूचकांक भी लाल निशान में कारोबार कर रहे थे।

इसके विपरीत बैंकिंग और ऊर्जा से जुड़े शेयरों ने बाजार को सहारा देने का प्रयास किया। निफ्टी पीएसयू बैंक, ऑयल एंड गैस, पीएसई, एनर्जी, प्राइवेट बैंक और एफएमसीजी सूचकांक बढ़त के साथ हरे निशान में टिके रहे। व्यापक बाजार की बात करें तो रुख मिलाजुला रहा; निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 114 अंक (0.18 प्रतिशत) की गिरावट के साथ 62,479 पर आ गया, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 18 अंकों की हल्की बढ़त के साथ 20,055 के स्तर पर देखा गया।

विदेशी बाजारों से मिल रहे संकेत भी घरेलू धारणा को प्रभावित कर रहे हैं। एशियाई बाजारों में टोक्यो, शंघाई, हांगकांग, बैंकॉक, सियोल और जकार्ता के प्रमुख इंडेक्स गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। इससे पहले बुधवार के सत्र में अमेरिकी बाजारों में भी नरमी देखी गई थी, जहां डाउ जोंस में 0.77 प्रतिशत और तकनीकी शेयरों वाले नैस्डैक में 0.64 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी का 23,500 के अहम रेजिस्टेंस स्तर से नीचे फिसलना तकनीकी कमजोरी का संकेत है, जिससे आगे और गिरावट की संभावना बन रही है। साथ ही बुनियादी वृहद-आर्थिक परिस्थितियां भी प्रतिकूल हो रही हैं। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 101 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है और अमेरिका के 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड में उछाल आकर यह 4.83 प्रतिशत हो गई है। बॉन्ड यील्ड बढ़ने से अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की आशंका प्रबल हुई है, जिसने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।

हालांकि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत बना हुआ है और चालू खाता घाटा भी स्थिर दायरे में है। इसके बावजूद जानकारों का आकलन है कि यदि कच्चे तेल की दरें लंबे समय तक 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर टिकी रहती हैं, तो इसका सीधा नकारात्मक असर देश की चालू वित्त वर्ष की जीडीपी विकास दर और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है।

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