नई दिल्ली के भारत मंडपम में चल रहे 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के अंतिम चरण की बैठकें आज रविवार को आयोजित की जा रही हैं। शनिवार को औपचारिक रूप से आरंभ हुए इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन भी आयोजन स्थल पर कड़े सुरक्षा प्रबंधों के बीच विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और प्रतिनिधियों की सहभागिता जारी है। भारत इस बार चौथी बार ब्रिक्स सम्मेलन की अध्यक्षता व मेजबानी की जिम्मेदारी संभाल रहा है।
सम्मेलन के पहले दिन शनिवार को सभी प्रतिभागी देशों के पूर्ण समर्थन के बाद ‘नई दिल्ली घोषणापत्र 2026’ औपचारिक रूप से जारी किया गया। घोषणापत्र के माध्यम से ब्रिक्स देशों ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि तमाम वैश्विक और अंतरराष्ट्रीय विवादों का हल कूटनीति, सार्थक विचार-विमर्श और आपसी बातचीत के जरिए ही निकाला जाना चाहिए।
घोषणापत्र में पश्चिम एशिया क्षेत्र में उत्पन्न तनाव की स्थिति पर भी गंभीरता से ध्यान केंद्रित किया गया। इसमें सभी पक्षों से संयम की नीति अपनाने और ऐसी किसी भी एकतरफा कार्रवाई से दूर रहने की अपील की गई, जिससे क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को और अधिक खतरा पैदा हो सकता हो।
इसी बीच, चीनी विदेश मंत्रालय की ओर से शनिवार को सामने आई जानकारी के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने दोनों पड़ोसी देशों के संबंधों को लेकर अहम पक्ष रखा। उन्होंने कहा कि दोनों मुल्कों का मुख्य ध्येय जन-कल्याण और वैश्विक शांति होना चाहिए। उन्होंने ब्रिक्स के तहत सहयोग को विस्तार देकर अंतरराष्ट्रीय स्थिरता और आर्थिक संवृद्धि में सकारात्मक भूमिका निभाने की बात कही।
संबंधों को दीर्घकाल तक सुदृढ़ और स्थिर बनाए रखने के लिए चीनी राष्ट्रपति ने चार सूत्रीय रूपरेखा सामने रखी। उन्होंने पहले सूत्र में स्पष्ट किया कि दोनों देशों को एक-दूसरे को अवसर और साझीदार के रूप में देखना चाहिए, न कि चुनौती या प्रतिद्वंद्वी के तौर पर। दूसरे सूत्र में उन्होंने साझा विकास को लक्ष्य बनाकर परस्पर लाभ वाले सहयोग को बढ़ाने का आह्वान किया।
तीसरे बिंदु के तहत उन्होंने आपसी सम्मान और समझ के सहारे बाधाएं दूर करने की वकालत की। उन्होंने कहा कि सीमा क्षेत्रों में शांति बनाए रखने के प्रयास और समग्र द्विपक्षीय रिश्ते साथ-साथ आगे बढ़ने चाहिए। अंत में, उन्होंने चौथे बिंदु में वैश्विक स्तर पर समन्वय को आवश्यक बताते हुए कहा कि ब्रिक्स के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र, जी-20 और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) जैसे मंचों पर भारत और चीन को एक-दूसरे के साथ सहयोग को और गहरा करना चाहिए।