विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बुधवार को न्यूयॉर्क में कैरेबियाई समुदाय (कैरिकॉम) के 15 सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों के साथ एक अहम बैठक की, जिसमें भारत और कैरेबियाई देशों के बीच आपसी साझेदारी को और अधिक मजबूत करने के उपायों पर गहन विमर्श किया गया।
स्थानीय समयानुसार बुधवार को संपन्न हुई इस बैठक के बाद विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर संवाद की जानकारी साझा की। उन्होंने कैरेबियाई समकक्षों के साथ मुलाकात पर प्रसन्नता जताते हुए सत्र के सफल संचालन के लिए कैरिकॉम की महासचिव डॉ. कार्ला बार्नेट और सूरीनाम के विदेश मंत्री मेल्विन बौवा के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। जयशंकर ने रेखांकित किया कि दोनों पक्षों के ऐतिहासिक जुड़ाव और विकास की साझा चुनौतियों ने इस आपसी एकजुटता को मजबूत आधार दिया है।
बैठक के दौरान कैरेबियाई क्षेत्र में भारत की साझेदारी से चल रही विकास योजनाओं की प्रगति का ब्योरा सामने रखा गया। कई कैरेबियाई देशों में लघु एवं मध्यम उद्यमों (एसएमई) से जुड़ी परियोजनाएं और ‘त्वरित प्रभाव परियोजनाएं’ (क्यूआईपी) पूरी हो चुकी हैं, जबकि कुछ राष्ट्रों में ये काम अभी प्रगति पर हैं। उल्लेखनीय है कि क्यूआईपी के अंतर्गत ऐसे कार्यों के लिए जरूरी वित्तीय और अन्य संसाधन उपलब्ध कराए जाते हैं, जिन्हें कम समय में पूरा किया जा सके और जिनका सीधा लाभ स्थानीय समुदाय तक पहुंचे।
स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग का उल्लेख करते हुए विदेश मंत्री ने बताया कि भारत की ओर से साझेदार देशों में कृत्रिम अंग लगाने के विशेष शिविर लगाए गए हैं। इसके अलावा कई देशों को हीमोडायलिसिस यूनिट्स भेंट की गई हैं तथा कुछ कैरिकॉम साझेदारों को अत्याधुनिक कॉम्पैक्ट मेडिकल ‘भीष्म क्यूब’ यूनिट्स सौंपी गई हैं। भारत में स्वदेशी रूप से विकसित ‘भीष्म क्यूब’ एक पोर्टेबल अस्पताल प्रणाली है, जिसे आपदा और आपात स्थिति के दौरान तत्काल उपचार के लिए आसानी से तैनात किया जा सकता है।
सांस्कृतिक और ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में कैरिकॉम के तीन प्रमुख देशों—सूरीनाम, त्रिनिदाद और गुयाना—में भारतीय मूल के नागरिकों की बड़ी आबादी निवास करती है, जबकि समूह के अन्य राष्ट्रों के साथ भारत औपनिवेशिक दौर का साझा इतिहास रखता है। इस पृष्ठभूमि में विदेश मंत्री ने सदस्य देशों से भारत द्वारा दिए जाने वाले प्रशिक्षण अवसरों का अधिक से अधिक लाभ उठाने का आह्वान किया। साथ ही उन्होंने उनकी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के अनुसार विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार करने की पेशकश भी की। भारत ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों को डिजिटल तकनीक समेत विभिन्न क्षेत्रों में क्षमता निर्माण के लिए लगातार ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम उपलब्ध कराता रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र की समीक्षा करते हुए जयशंकर ने कहा कि भारतीय सहायता से क्षेत्र में सौर ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे को प्रोत्साहन मिला है। उन्होंने कैरिकॉम देशों से आग्रह किया कि वे भारत में मुख्यालय वाले दो प्रमुख वैश्विक मंचों—’अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन’ और ‘वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन’—की सदस्यता लेने पर विचार करें। ये दोनों संगठन पर्यावरण संरक्षण, वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों के विस्तार और जलवायु संकट की रोकथाम के लिए वैश्विक स्तर पर कार्य कर रहे हैं।