वैश्विक दबाव और कच्चे तेल में उछाल से शेयर बाजार में दूसरे दिन भी मंदी, सेंसेक्स 243 अंक लुढ़का

वैश्विक दबाव और कच्चे तेल में उछाल से शेयर बाजार में दूसरे दिन भी मंदी, सेंसेक्स 243 अंक लुढ़का

घरेलू शेयर बाजार में मंगलवार को लगातार दूसरे कारोबारी दिन कमजोरी देखने को मिली, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के ऊंचे भाव और बॉन्ड यील्ड के उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाते हुए बिकवाली की। इस बिकवाली के चलते बीएसई सेंसेक्स 242.65 अंक (0.33 प्रतिशत) फिसलकर 72,529.07 के स्तर पर आ गया, वहीं एनएसई निफ्टी 64.05 अंक यानी 0.28 प्रतिशत गिरकर 22,716.20 अंक पर बंद हुआ।

सत्र के दौरान बड़ी कंपनियों (लार्ज-कैप) के शेयरों पर बिकवाली का असर स्पष्ट रूप से देखा गया। निफ्टी इंडेक्स में टाइटन कंपनी के शेयरों में सर्वाधिक गिरावट दर्ज की गई। इसी तरह सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्र में भी सुस्ती का माहौल रहा, जहां विप्रो और एचसीएल टेक जैसी दिग्गज कंपनियों ने बेंचमार्क सूचकांकों पर सबसे ज्यादा दबाव बनाया।

बेंचमार्क सूचकांकों के साथ-साथ व्यापक बाजार में भी निवेशकों की धारणा कमजोर बनी रही, जिसके चलते मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में बिकवाली देखी गई। दिन के कारोबार के अंत में निफ्टी मिडकैप इंडेक्स में 0.99 प्रतिशत का नुकसान दर्ज हुआ, जबकि निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.81 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।

सेक्टोरल मोर्चे पर कच्चे तेल की महंगाई से इनपुट लागत बढ़ने और वैश्विक आर्थिक वृद्धि की गति धीमी पड़ने के अंदेशे ने कई क्षेत्रों को प्रभावित किया। इसके चलते कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, केमिकल्स, रियल्टी और आईटी सेक्टर से जुड़े शेयरों में भारी दबाव दिखा। निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, निफ्टी केमिकल, निफ्टी रियल्टी और निफ्टी आईटी पूरे सत्र के दौरान सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाले सेक्टोरल सूचकांकों में शामिल रहे।

चारों तरफ छाई मंदी के बीच फार्मास्युटिकल सेक्टर ने बाजार को सहारा देने का प्रयास किया। चौतरफा बिकवाली के बावजूद निफ्टी फार्मा इंडेक्स ने बाजार के विपरीत रुख दिखाते हुए अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया और मजबूती दर्ज करने वाले सेक्टर्स में शीर्ष पर रहा।

ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी और वैश्विक बॉन्ड यील्ड की अनिश्चितता के कारण बाजार में रक्षात्मक रुख हावी बना हुआ है, जिसके चलते निवेशक केवल चुनिंदा शेयरों में ही पैसा लगा रहे हैं। जानकारों के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच तनाव घटने पर बेहतर जोखिम धारणा के साथ बाजार में तेज रिलीफ रैली संभव है। तब तक निवेशक व्यापक बाजार में बड़ा एक्सपोजर लेने से बचते हुए मजबूत फंडामेंटल और पारदर्शी आय वाली कंपनियों पर ही ध्यान केंद्रित रखेंगे।

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