पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और समुद्री व्यापार पर पड़े इसके असर को देखते हुए केंद्र सरकार ने भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत दी है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान जारी कर घोषणा की कि निर्यात सुविधा के लिए शुरू की गई ‘रिलीफ’ (लचीलापन और लॉजिस्टिक्स हस्तक्षेप) योजना के दूसरे घटक की अवधि को आगे बढ़ा दिया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, यह निर्णय खाड़ी और निकटवर्ती समुद्री मार्गों में जहाजों की आवाजाही पर पड़े प्रतिकूल प्रभावों के मद्देनजर लिया गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य वर्तमान वैश्विक और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी अनिश्चितताओं के बीच भारतीय निर्यात क्षेत्र की स्थिरता को बनाए रखना तथा अंतरराष्ट्रीय व्यापार के प्रवाह को निरंतर जारी रखना है।
‘रिलीफ’ योजना का दूसरा घटक विशेष रूप से निर्यातकों को निर्धारित गंतव्यों के लिए आगामी खेपों पर ईसीजीसी (निर्यात ऋण गारंटी निगम) कवर लेने के लिए प्रेरित करता है। इसके तहत पात्र निर्यातकों को 95 प्रतिशत तक का जोखिम संरक्षण उपलब्ध कराया जा रहा है। यह सुविधा 16 मार्च 2026 या उसके पश्चात जारी की गई स्टैंडअलोन पॉलिसियों अथवा संपूर्ण टर्नओवर पॉलिसियों पर लागू होती है।
इस योजना के दायरे में ऊर्जा से जुड़े शिपमेंट को छोड़कर लगभग सभी प्रमुख कार्गो शामिल किए गए हैं। इनमें फुल कंटेनर लोड (एफसीएल), लेस दैन कंटेनर लोड (एलसीएल) और तापमान-नियंत्रित रीफर कंटेनर शामिल हैं। इसके साथ ही इस घटक में यह भी प्रावधान है कि निर्धारित अवधि के दौरान निर्यातकों के बीमा प्रीमियम में कोई वृद्धि नहीं होगी और यह व्यवधान से पूर्व के स्तर पर ही स्थिर रहेगा।
वाणिज्य मंत्रालय ने रेखांकित किया कि ‘रिलीफ’ को 19 मार्च 2026 को एक विशेष लक्षित पहल के रूप में लागू किया गया था। इसका प्राथमिक लक्ष्य पश्चिम एशिया और खाड़ी गलियारे में उपजे संकट से प्रभावित निर्यातकों को अत्यधिक माल ढुलाई भाड़े, अप्रत्याशित रूप से बढ़े बीमा प्रीमियम और युद्ध जनित जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करना था।