दुबई से तेल अवीव जा रहे यात्री विमान को बड़े हादसे से सुरक्षित निकालने वाले भारतीय कैप्टन स्मित मच्छार के शौर्य की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को औपचारिक रूप से सराहना की। दोनों के बीच हुई विशेष बातचीत में प्रधानमंत्री ने कहा कि संकट के क्षणों में दिखाई गई उनकी सूझबूझ ने न सिर्फ सैकड़ों लोगों का जीवन बचाया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के सभी वैमानिकों की प्रतिष्ठा को भी मजबूती दी।
यूएई के अस्पताल में उपचाराधीन कैप्टन मच्छार से वीडियो संवाद स्थापित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी यह बहादुरी देश के मूलभूत संस्कारों का परिचायक है। उन्होंने रेखांकित किया कि देश आज स्वाभिमान से कह सकता है कि हिंदुस्तानी संस्कृति जीवन संकट में डालने वालों की नहीं, बल्कि जीवन की रक्षा करने वालों की पहचान रखती है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि समय रहते दृढ़ता से कदम न उठाए गए होते, तो इसके दूरगामी और अत्यंत प्रतिकूल प्रभाव भारतीय पायलटों की छवि पर पड़ सकते थे। उन्होंने कैप्टन से कहा कि स्वयं लहूलुहान होकर भी अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखना और दूसरों के जीवन को प्राथमिकता देना एक असाधारण कार्य है। उन्होंने कहा कि इस कार्य से हर भारतवासी का सिर गर्व से ऊंचा हुआ है।
चर्चा के क्रम में कैप्टन स्मित मच्छार ने कॉकपिट के उस विचलित करने वाले घटनाक्रम का विवरण साझा किया। उन्होंने बताया कि उस अत्यंत कठिन समय में वे मानसिक संबल के लिए हनुमान चालीसा पढ़ रहे थे और वे अपनी जान बचने का श्रेय पूर्ण रूप से ईश्वरीय कृपा को देते हैं।
यह पूरा घटनाक्रम फ्लाईदुबई की उस नियमित सेवा से जुड़ा है, जो दुबई से इजरायल के लिए 174 यात्रियों को लेकर रवाना हुई थी। यात्रा के दौरान सह-पायलट ने अप्रत्याशित रूप से मुख्य पायलट स्मित मच्छार पर चाकू से प्राणघातक वार कर दिया था। इस संदर्भ में इजरायल के प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया था कि सह-पायलट पूरे विमान को नष्ट करने का प्रयास कर रहा था।
घातक प्रहारों के बीच कैप्टन मच्छार ने अपना संतुलन बनाए रखा, सह-पायलट के हमले को निष्प्रभावी करने का प्रयास किया और कॉकपिट का दरवाजा खोलने में सफल रहे। इसके फौरन बाद विमान के चालक दल के सदस्यों और कुछ यात्रियों ने तत्परता दिखाते हुए सह-पायलट को जकड़ लिया। इसके उपरांत विमान को सऊदी अरब के तबूक विमानतल पर कुशलतापूर्वक आपातकालीन लैंडिंग कराई गई।