रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने मंगलवार को देश में ही विकसित ‘हाई-एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम’ (एचएपीएस) का सफल प्रायोगिक परीक्षण पूरा किया। इस उड़ान के दौरान मानवरहित प्लेटफॉर्म ने समुद्र तल से 21 किलोमीटर की ऊंचाई हासिल की और समताप मंडल (स्ट्रैटोस्फियर) में लंबे समय तक टिके रहने का प्रभावी प्रदर्शन किया। माना जा रहा है कि इस तकनीकी सफलता से देश की एयरोस्पेस क्षमताओं को नया विस्तार मिलेगा।
रक्षा मंत्रालय द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह परीक्षण उड़ान 21 किलोमीटर की शीर्ष ऊंचाई तक पहुंची। नीचे उतरने के निर्देश जारी होने से पूर्व इस प्रणाली ने लगभग 20 किलोमीटर की ऊंचाई पर आधे घंटे से अधिक समय बिताया। तय प्रक्रिया के तहत प्लेटफॉर्म को सुरक्षित ढंग से जमीन पर वापस उतारा गया और उड़ान के दौरान दर्ज किए गए सभी तकनीकी आंकड़ों का गहन विश्लेषण किया गया।
मंत्रालय के आधिकारिक बयान के मुताबिक, इस प्रायोगिक उड़ान ने समुद्र तल से 21 किलोमीटर की ऊंचाई प्राप्त की और पुनः वापसी का निर्देश मिलने से पहले 20 किलोमीटर के दायरे में 30 मिनट से ज्यादा वक्त तक स्थिर रही। इसके बाद पूरी प्रणाली को सुरक्षित बरामद कर लिया गया और संबंधित उड़ान प्रदर्शन डेटा का मूल्यांकन किया गया।
इस परीक्षण से समताप मंडल के अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में प्रणाली की परिचालन क्षमता प्रमाणित हुई है। वायुमंडल का यह हिस्सा लंबे समय तक निगरानी रखने, संचार तंत्र को सशक्त बनाने और टोह लेने जैसे अभियानों के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है। परीक्षण के दौरान हवा में उड़ रहे इस प्लेटफॉर्म ने ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन को निरंतर रियल-टाइम वीडियो और वाहन संचालन से जुड़ा डेटा प्रेषित किया।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि परीक्षण वाहन कई अत्याधुनिक नियंत्रण और माप उपकरणों से लैस था। इसमें इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट, सटीक जीपीएस रिसीवर, ऑनबोर्ड कैमरे और ऊंचाई नियंत्रित करने वाली प्रणालियां शामिल थीं। मिशन के दौरान इन सभी सहायक प्रणालियों ने पूरी तरह मानक के अनुसार काम किया।
यह महत्वपूर्ण उड़ान परीक्षण कई प्रमुख संस्थानों के संयुक्त तालमेल से संपन्न हुआ। इसमें भारतीय वायु सेना, सैन्य उड़नयोग्यता एवं प्रमाणीकरण केंद्र (सीईएमआईएलएसी), नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए), भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) तथा अन्य नागरिक प्रशासन इकाइयों की सक्रिय भागीदारी रही।
इस प्रणाली की रूपरेखा और विकास का दायित्व डीआरडीओ की आगरा स्थित प्रयोगशाला ‘एरियल डिलीवरी रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट’ (एडीआरडीई) संभाल रही है। इसे स्ट्रैटोस्फियर में लंबे समय तक तैरते रहने वाले एक ऐसे मंच के रूप में तैयार किया जा रहा है, जो व्यापक निगरानी और ट्रैकिंग अभियानों को सुचारू रूप से अंजाम दे सके।
इस उपलब्धि पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, वायु सेना, सार्वजनिक उपक्रमों और उद्योग जगत के साझेदारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह परीक्षण उन्नत एयरोस्पेस तकनीक और समताप मंडल में कार्यरत रहने वाले एयरशिप के निर्माण में भारत की आत्मनिर्भरता का एक बड़ा मील का पत्थर है।