अयोध्या में 7 नवंबर को मनेगा मुख्य दीपोत्सव, पर्यटन विभाग ने तैयार की तीन दिवसीय आयोजनों की रूपरेखा

अयोध्या में 7 नवंबर को मनेगा मुख्य दीपोत्सव, पर्यटन विभाग ने तैयार की तीन दिवसीय आयोजनों की रूपरेखा

उत्तर प्रदेश के पर्यटन विभाग ने अयोध्या में 6 से 8 नवंबर तक आयोजित होने वाले ‘दीपोत्सव-2026’ के लिए व्यापक खाका तैयार किया है, जिसके तहत 7 नवंबर को मुख्य समारोह आयोजित होगा। इस तीन दिवसीय उत्सव में रामनगरी के प्रवेश मार्गों से लेकर प्रमुख घाटों तक रामायण कालीन प्रसंगों, कलात्मक आकृतियों और विशेष प्रकाश व्यवस्था के जरिए आस्था का भव्य वातावरण तैयार किया जाएगा।

दीपोत्सव के दौरान शहर में आने वाले पर्यटकों की सुविधा के लिए प्रमुख चौराहों और कार्यक्रम स्थलों के आसपास 10 विशेष वे-फाइंडर लगाए जा रहे हैं। आगंतुकों के अनुभव को यादगार बनाने के उद्देश्य से रामकथा पार्क और राम की पैड़ी पर 10-10 सेल्फी प्वाइंट विकसित किए जाएंगे। इन सभी त्रि-आयामी कलाकृतियों की बनावट और डिजाइन पूरी तरह भिन्न होंगे। इसके साथ ही, लता मंगेशकर चौक से लेकर राम की पैड़ी तक के मार्ग को भी कलात्मक स्थापनाओं से सुसज्जित किया जाएगा।

अयोध्या में प्रवेश करने वाले राष्ट्रीय राजमार्गों—सुल्तानपुर, रायबरेली और लखनऊ की दिशा से आने वाले मार्गों—तथा धर्म पथ पर रामायण के प्रसंगों से जुड़े 10 विशाल द्वारों का निर्माण किया जा रहा है। ये द्वार आधुनिक रोशनी और विशिष्ट डिजाइनों से युक्त होंगे। राम की पैड़ी के पास सड़क किनारे पुष्पक विमान थीम पर आधारित इंस्टॉलेशन मुख्य आकर्षण बनेगा। इसके अतिरिक्त, रामायण की कथा को दर्शाती राम रथ झांकी और राम दरबार का मंचन भी किया जाएगा।

आयोजन के तहत रामकथा पार्क के मंच को मौजूदा ढांचे के अनुरूप आधुनिक रूप दिया जा रहा है, जहां बैठने की व्यवस्था, दोनों तरफ सीढ़ियां, पर्दे, रंगोली, ताजे फूल, एलईडी स्क्रीन और ध्वनि-प्रकाश तंत्र की व्यवस्था होगी। पार्क के द्वारों को पारंपरिक भारतीय प्रतीकों से सजाया जाएगा। साथ ही, पार्क के निकटवर्ती हेलीपैड क्षेत्र में भरत मिलाप मंच व पाथवे तैयार किए जा रहे हैं, जबकि सरयू नदी और राम की पैड़ी पर विशेष फ्लोटर्स तैराए जाएंगे तथा मार्गों पर फ्लैग पोल लगाए जाएंगे।

पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह के अनुसार, दीपोत्सव के माध्यम से अयोध्या के आध्यात्मिक वैभव को एक नए कलात्मक स्वरूप में प्रस्तुत करने की तैयारी है, ताकि आगंतुकों को यहां के दिव्य स्वरूप की अनूठी अनुभूति हो सके। विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात ने बताया कि प्रमुख मार्गों के किनारे रामायण के प्रसंगों, विशेषकर लंका कांड को बेहद सरल भाषा की एकल पंक्तियों में उकेरा जाएगा, जिससे आधुनिक कला और पारंपरिक आस्था का संतुलन हर दर्शक को प्रभावित कर सके।

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