प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान दौर में तकनीक, डेटा, ज्ञान और नवाचार ही शक्ति के नए आधार हैं, लेकिन इनका वास्तविक महत्व इस बात पर निर्भर करता है कि इनका उपयोग जन-सशक्तिकरण के लिए किस प्रकार किया जा रहा है।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि 21वीं सदी के तीसरे दशक में वैश्विक स्तर पर गहरे बदलाव देखने को मिल रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि असल सवाल यह नहीं है कि ताकत किसके हाथों में है, बल्कि यह है कि उसका इस्तेमाल किस दिशा में हो रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आधुनिक तकनीक सिर्फ कुछ व्यक्तियों के फायदे तक सीमित रहेगी या फिर यह करोड़ों लोगों के लिए तरक्की के नए रास्ते खोलेगी।
प्रधानमंत्री ने इसी संदर्भ में ‘पावर टू एम्पावर’ (सशक्तिकरण की शक्ति) की संकल्पना को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि दुनिया को अब नियंत्रण के स्थान पर लोगों को सक्षम बनाने, टकराव व होड़ के बजाय आपसी तालमेल बढ़ाने और केवल अपनी तरक्की तक सीमित रहने के बजाय दूसरों को सफल बनाने की सोच अपनानी होगी।
भारतीय मूल्यों का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि ज्ञान, संपदा और सामर्थ्य का उपयोग किसी व्यापक और सार्थक उद्देश्य के लिए करना देश की हजारों वर्ष पुरानी परंपरा का हिस्सा रहा है। उन्होंने दोहराया कि भारत ने अपने शासन और नीतियों में इसी सिद्धांत को व्यवहार में लाकर दिखाया है।
अक्टूबर 2026 में पहली बार भारत में आयोजित हो रहे इस सम्मेलन में 500 से अधिक वैश्विक सरकारी और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। फोरम के आयोजन का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके लिए सही समय पर बिल्कुल सही स्थान का चयन किया गया है।
उन्होंने अंत में कहा कि भारत आज महज एक निवेश गंतव्य नहीं, बल्कि वैश्विक भविष्य को दिशा देने वाला एक विश्वसनीय भागीदार है। ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर अग्रसर देश विश्व के लिए भरोसेमंद आर्थिक इंजन बनने और एक संतुलित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा रहा है।