दाल प्रोटीन नवाचार में भारत और कनाडा बढ़ाएंगे साझेदारी, कुंडली के एनआईएफटीईएम में खुलेगा संयुक्त उत्कृष्टता केंद्र

दाल प्रोटीन नवाचार में भारत और कनाडा बढ़ाएंगे साझेदारी, कुंडली के एनआईएफटीईएम में खुलेगा संयुक्त उत्कृष्टता केंद्र

राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान (एनआईएफटीईएम-के), कुंडली में 13 अक्टूबर, 2026 को दाल प्रोटीन नवाचार, मूल्य संवर्धन और रणनीतिक साझेदारी पर एक उच्चस्तरीय भारत-कनाडा गोलमेज सम्मेलन का आयोजन किया गया। केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के अधीन कार्यरत इस राष्ट्रीय संस्थान में आयोजित बैठक में दोनों देशों के नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और शिक्षाविदों ने हिस्सा लिया। विचार-विमर्श का केंद्रीय बिंदु दालों से प्रोटीन निर्माण, आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण, निरंतर पोषण सुरक्षा और द्विपक्षीय अनुसंधान को नई दिशा देना रहा। इस दौरान एनआईएफटीईएम-के और कनाडा के यूनिवर्सिटी ऑफ सस्केचेवान के बीच चल रहे सहयोग को अगले वर्ष तक संस्थान परिसर में एक संयुक्त उत्कृष्टता केंद्र के रूप में स्थापित करने की रूपरेखा पर सहमति बनी।

सम्मेलन में शामिल सस्केचेवान के उच्च शिक्षा मंत्री केन शेवेल्डेऑफ ने द्विपक्षीय संबंधों को प्रगाढ़ बनाने में आपसी संवाद और व्यक्तिगत संपर्कों को अत्यंत अहम बताया। उन्होंने शोध, उच्च शिक्षा और नवाचार के क्षेत्र में व्यापक संभावनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों के शैक्षणिक संस्थान और औद्योगिक इकाइयां साझा प्राथमिकताओं के आधार पर बेहतर नतीजे हासिल कर सकती हैं। इस सत्र में सस्केचेवान सरकार के प्रबंध निदेशक डेविड एंडरसन तथा वरिष्ठ व्यापार अधिकारी हरीश वैद्यनाथन भी मौजूद रहे। वहीं, यूनिवर्सिटी ऑफ सस्केचेवान के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व उपाध्यक्ष (शोध) बलजीत सिंह, सहायक डीन ट्रेवर क्रो, प्रोफेसर अजय दलाई और सुप्रतिम घोष ने किया।

एनआईएफटीईएम-के के निदेशक हरिंदर सिंह ओबेरॉय ने दोनों संस्थानों के बीच करीब सात महीने पहले हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) की समीक्षा करते हुए इसे ठोस जमीनी परिणामों में बदलने की आवश्यकता जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल दस्तावेजों तक सीमित रहने के बजाय इस साझेदारी को समयबद्ध लक्ष्यों और कार्ययोजना के तहत आगे बढ़ाना होगा। ओबेरॉय ने अगले वर्ष तक प्रस्तावित संयुक्त उत्कृष्टता केंद्र की स्थापना के लिए एक व्यावहारिक रोडमैप तैयार करने, संस्थागत समन्वय स्थापित करने और स्पष्ट जिम्मेदारियां तय करने पर बल दिया। उन्होंने साझेदार संस्थानों से शुरुआती दो वर्षों की अनुसंधान प्राथमिकताओं को शीघ्र अंतिम रूप देने का आग्रह किया।

तकनीकी सत्र के दौरान विशेषज्ञों ने दालों के प्रसंस्करण और प्रोटीन आधारित उत्पादों के निर्माण में आने वाली प्रमुख व्यावहारिक चुनौतियों पर मंथन किया। चर्चा में कच्चे माल की गुणवत्ता व पोषक तत्वों की एकरूपता बनाए रखने, प्रसंस्करण के दौरान ऊर्जा की खपत घटाने, उत्पादन मानकों को सुव्यवस्थित करने और दाल प्रोटीन के कार्यात्मक गुणों को सुरक्षित रखने के उपायों पर जोर दिया गया। इसके साथ ही खाद्य उत्पादों की संरचना (टेक्सचर) से जुड़ी दिक्कतों को दूर करने और विभिन्न पोषण संबंधी प्राथमिकताओं के अनुरूप नए मूल्य-संवर्धित उत्पाद तैयार करने पर सहमति बनी।

अकादमिक सहयोग को विस्तार देते हुए यूनिवर्सिटी ऑफ सस्केचेवान के उपाध्यक्ष (शोध) बलजीत सिंह ने घोषणा की कि विश्वविद्यालय ने ऐसे पीएचडी शोधार्थियों का चयन कर लिया है, जो अपने शोध कार्य का एक हिस्सा एनआईएफटीईएम-के में पूरा करेंगे। उन्होंने बताया कि कुपोषण के सभी रूपों को समाप्त करने के संयुक्त राष्ट्र सतत विकास लक्ष्य से प्रेरित होकर कनाडा सरकार के समक्ष ‘एसडीजी 2.2 के लिए दालों में पोषक तत्व वृद्धि में सतत स्वास्थ्य नवाचार’ शीर्षक से एक संयुक्त वित्तपोषण प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया गया है।

कार्यक्रम में पल्स कनाडा, सस्केचेवान पल्स ग्रोअर्स, अल्बर्टा पल्स ग्रोअर्स, एनवायरोवे, शास्त्री इंडो-कैनेडियन इंस्टीट्यूट सहित भारतीय पक्ष से न्यूट्रीशन इंटरनेशनल, न्यूट्रीसर्कल, इंडिया पल्स एंड ग्रेन्स एसोसिएशन, आईसीएआर-आईआईपीआर कानपुर, आईसीआरआईएसएटी, गुड फूड इंस्टीट्यूट इंडिया, डाइट फूड्स और आईआईटी दिल्ली के प्रतिनिधियों ने शिरकत की। सम्मेलन का निष्कर्ष रहा कि प्रयोगशालाओं में होने वाले अनुसंधान को उद्योग जगत के सहयोग से व्यावसायिक स्तर पर बाजार तक पहुंचाया जाए, ताकि टिकाऊ एवं पादप-आधारित पोषण की बढ़ती वैश्विक मांग को पूरा किया जा सके।

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