केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर के स्टाइन ऑडिटोरियम में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘विकसित भारत की राह: शताब्दी सम्मेलन’ के समापन सत्र में भाग लिया। दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) द्वारा संयोजित इस मंच से उन्होंने देश की युवा पीढ़ी को प्रेरित करते हुए कहा कि वे ऊर्जा, वित्त और परिवहन-लॉजिस्टिक्स की बाधाओं को सफल उद्यमों में तब्दील करें और 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र की श्रेणी में लाने का जिम्मा उठाएं।
सम्मेलन में उपस्थित प्रमुख शिक्षाविदों, अर्थशास्त्रियों, नीति निर्धारकों तथा विद्यार्थियों के समक्ष केंद्रीय मंत्री ने देश की प्रगति यात्रा में स्थिरता और सुधार के अंतर्संबंधों पर अपने विचार रखे। एसआरसीसी के सौ वर्ष पूरे होने के ऐतिहासिक अवसर की चर्चा करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि औपनिवेशिक काल का यह संस्थान वर्तमान में भारतीय युवाओं को अंतरराष्ट्रीय उपक्रमों की कमान संभालने और व्यापक संभावनाओं से भरे देश में लोक नीतियों के निर्माण में योगदान देने लायक बना रहा है।
प्रसिद्ध दार्शनिक अल्फ्रेड नॉर्थ व्हाइटहेड के विचारों का संदर्भ देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि उच्च शिक्षण संस्थानों की मूल भूमिका नवाचार की कल्पनाशीलता को यथार्थ के अनुभवों से संबद्ध करना है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे कॉमर्स और इकोनॉमिक्स के अपने किताबी ज्ञान का उपयोग विवेकसंगत निर्णय लेने, पुरानी रूढ़ियों पर सवाल खड़े करने और जमीनी चुनौतियों को उपयोगी व्यावसायिक अवसरों में बदलने में करें।
देश की ऊर्जा सुरक्षा की चर्चा करते हुए पुरी ने जानकारी दी कि केंद्र सरकार ने 84,084 करोड़ रुपये की लागत वाली ‘समुद्र मंथन योजना’ (राष्ट्रीय अपतटीय अन्वेषण योजना) को हरी झंडी दे दी है। इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य अपतटीय क्षेत्रों में मौजूद हाइड्रोकार्बन संपदा की खोज में तेजी लाना, उन्नत प्रौद्योगिकी को अपनाना, साझे बुनियादी ढांचे की स्थापना करना और स्थानीय विनिर्माण तंत्र को मजबूत बनाना है।
हरित ऊर्जा और संपोषणीय विकास पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने 1 अक्टूबर से प्रभावी हुई ‘गोबरधन योजना’ का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘कचरे से कंचन’ और ‘अन्नदाता से ऊर्जादाता’ के ध्येय का स्मरण कराते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि कृषि अवशेषों और जैविक कचरे को ऊर्जा में रूपांतरित करना एक व्यावहारिक व्यावसायिक मॉडल है, जो किसानों की आमदनी बढ़ाने के साथ-साथ ऊर्जा सुरक्षा को भी सुदृढ़ करेगा।
वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल और पश्चिम एशिया के ताजा भू-राजनीतिक संकटों का ब्योरा देते हुए उन्होंने बताया कि भारत ने अपने आपूर्ति स्रोतों में विविधता लाकर तथा घरेलू क्षमताओं में विस्तार करके ईंधन की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित रखी है। अंत में, प्रधानमंत्री की हालिया एसआरसीसी यात्रा के वक्तव्य को दोहराते हुए पुरी ने युवाओं से पूछा कि जब भारतीय पेशेवर दुनिया की शीर्ष कंपनियों का संचालन कर रहे हैं, तो भारतीय कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मंच पर अग्रणी क्यों नहीं हो सकतीं। उन्होंने युवाओं को विश्वसनीयता और नवाचार के दम पर विश्वस्तरीय संस्थाएं खड़ी करने और 2047 के संकल्प को साकार करने के लिए प्रेरित किया।