विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को बाकू में अजरबैजान के विदेश मंत्री जेयहुन बैरामोव के साथ संयुक्त वक्तव्य जारी करते हुए कहा कि दोनों देशों की प्राथमिकताएं शांति, उन्नति और आर्थिक संपन्नता को सुदृढ़ करने पर केंद्रित हैं। जयशंकर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सीमा पार आतंकवाद, सैन्य संघर्ष और क्षेत्रीय अशांति दोनों देशों के साझा विरोधी हैं। उन्होंने अजरबैजान और आर्मेनिया के बीच बीते वर्ष अगस्त में संपन्न शांति समझौते का समर्थन करते हुए क्षेत्र में स्थायी स्थिरता की उम्मीद जताई।
संयुक्त वक्तव्य के दौरान विदेश मंत्री ने कहा कि भारत क्षेत्रीय परिस्थितियों पर करीब से नजर बनाए हुए है और नई दिल्ली का अटूट विश्वास है कि किसी भी प्रकार के मतभेद का समाधान केवल आपसी संवाद और राजनयिक माध्यमों से ही संभव है। दोनों नेताओं ने यूरेशिया, यूरोप और पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण हालात तथा उनसे उपजे वैश्विक दुष्प्रभावों पर विचार-विमर्श किया। जयशंकर ने ध्यान दिलाया कि इन संकटों के कारण विकासशील व ग्लोबल साउथ के देशों के समक्ष खाद्य सुरक्षा, ईंधन आपूर्ति, उर्वरक और वित्तीय संसाधनों की भारी किल्लत पैदा हो गई है।
जयशंकर ने समकालीन दौर के अनुसार वैश्विक और क्षेत्रीय संस्थानों के पुनर्गठन और विस्तार पर बल दिया। उन्होंने बैरामोव के साथ हुई वार्ता को फलदायी बताते हुए कहा कि इससे द्विपक्षीय संबंधों को एक स्पष्ट दिशा मिली है। दोनों पक्षों ने ऊर्जा, वाणिज्य और पूंजी निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग की व्यापक संभावनाओं को रेखांकित किया। विदेश मंत्री ने अपने अजरबैजानी समकक्ष को उनकी सुविधा के अनुसार शीघ्र भारत यात्रा पर आने का आमंत्रण भी दिया।
परिवहन संपर्क के महत्व को रेखांकित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि आईएनएसटीसी परियोजना के तहत दोनों देशों का आपसी समन्वय अहम है, जिसमें ईरान एक प्रमुख भागीदार है। उन्होंने दोनों देशों के बीच विमान सेवाओं के और अधिक विस्तार की आवश्यकता जताई। इसके साथ ही जयशंकर ने पश्चिम एशिया संकट के दौरान ईरान से भारतीय विद्यार्थियों को सकुशल निकालने में अजरबैजान के मानवीय सहयोग और वहां पढ़ रहे भारतीय छात्रों के प्रति प्रदर्शित संवेदनशीलता के लिए धन्यवाद दिया।
बाकू यात्रा की शुरुआत में जयशंकर ने अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव से उच्चस्तरीय मुलाकात की थी। उन्होंने राष्ट्रपति को भारतीय नेतृत्व—राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी—की ओर से बधाई संदेश प्रेषित किए। जयशंकर ने कहा कि दोनों देश स्वतंत्र निर्णय लेने वाली रणनीतिक दृष्टि साझा करते हैं। उन्होंने ऐतिहासिक जन-संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को आधुनिक भारत-अजरबैजान संबंधों का मुख्य आधार बताया।