पीएम मोदी ने भुवनेश्वर में किया आरबीआई साइबर सुरक्षा संस्थान का शुभारंभ; कहा—पारदर्शी नीतियों से सुधरे देश के वित्तीय हालात

पीएम मोदी ने भुवनेश्वर में किया आरबीआई साइबर सुरक्षा संस्थान का शुभारंभ; कहा—पारदर्शी नीतियों से सुधरे देश के वित्तीय हालात

भारतीय रिजर्व बैंक के नवनिर्मित डेटा सेंटर और साइबर सिक्योरिटी ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट का उद्घाटन रविवार को ओडिशा के भुवनेश्वर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया गया। सभा को संबोधित करते हुए उन्होंने इसे नए भारत की प्रशासनिक कार्यशैली का उत्कृष्ट उदाहरण बताया और कहा कि यह तकनीकी ढांचा राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा और पारदर्शिता को नई मजबूती प्रदान करेगा।

समारोह में उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों के दौर में विकास की पहुंच असंतुलित थी। महानगरों में उत्कृष्ट अस्पताल और एयरपोर्ट जैसी सुविधाएं थीं, जबकि देश का बड़ा भूभाग बुनियादी संसाधनों की बाट जोहता रहा। आम लोगों को चिकित्सा के लिए लंबी यात्राएं करनी पड़ती थीं और रेलवे स्टेशनों पर जरूरी सुविधाओं का भारी अभाव था। वर्तमान सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता विकास की इस खाई को पाटकर ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ना है।

प्रधानमंत्री ने आंकड़ों का उल्लेख करते हुए बताया कि आज देश के छोटे शहरों को राजमार्गों और एम्स जैसी स्वास्थ्य सुविधाओं से जोड़ा गया है, वहीं ग्रामीण इलाकों में लगभग पौने दो लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर जनसेवा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सुशासन का असली पैमाना यही है कि वह नागरिकों के जीवन को आसान बनाए और उन्हें प्रगति के समान अवसर उपलब्ध कराए।

वित्तीय समावेशन की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि दशकों पहले बैंकों के राष्ट्रीयकरण का दावा गरीबों के नाम पर किया गया था, मगर 2014 तक देश का एक बड़ा वर्ग बैंकिंग नेटवर्क से कटा रहा। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर कटाक्ष करते हुए उन्होंने कहा कि उस दौर में पहुंच वाले रसूखदारों को ‘फोन बैंकिंग’ के जरिए बेरोकटोक कर्ज बांटे गए, जिससे बैंकिंग प्रणाली एनपीए के भारी संकट में फंस गई, जबकि आम नागरिक को साधारण खाता खुलवाने के लिए भी दर-दर भटकना पड़ता था। आज पारदर्शी नीतियों और डिजिटल तकनीक के बल पर भारतीय बैंकिंग व्यवस्था दुनिया की मजबूत प्रणालियों में शुमार है।

प्रधानमंत्री ने सुशासन के मंत्र ‘नागरिक देवो भव:’ का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले जहां दिल्ली से जारी एक रुपये में से महज 15 पैसे जनता तक पहुंचने की लाचारी जताई जाती थी, वहीं आज पूरी राशि शत-प्रतिशत सीधे हकदार के खाते में पहुंचती है। उन्होंने बताया कि मुद्रा योजना के जरिए 13 करोड़ लोगों ने स्वरोजगार शुरू किया है, जबकि अटल पेंशन योजना का लाभ 9 करोड़ लोगों तक पहुंचा है, जिसमें ओडिशा के 38 लाख नागरिक भी शामिल हैं।

अंत में उन्होंने आधुनिक वित्तीय चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि वर्तमान समय में किसी भी देश को आर्थिक आघात पहुंचाकर भी युद्ध लड़े जा सकते हैं। ऐसे में भारत को आर्थिक प्रगति के साथ-साथ अपनी वित्तीय व्यवस्था को साइबर खतरों से पूरी तरह सुरक्षित रखना होगा। पिछले दस वर्षों में बैंकिंग को जन-जन तक पहुंचाया गया है, और अब आगामी समय इस व्यवस्था को अभेद्य व विश्वसनीय बनाने का है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *