केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को जयपुर (खातीपुरा)-टाटानगर-सांतरागाछी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह नई रेल सेवा राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल के मध्य आवागमन को सुगम बनाएगी तथा दोनों छोरों के बीच रेल संपर्कों को नया विस्तार देगी।
उद्घाटन का मुख्य आयोजन जयपुर के खातीपुरा स्टेशन पर संपन्न हुआ, जहां से स्पेशल ट्रेन गंतव्य के लिए रवाना की गई। इसके साथ ही टाटानगर और सांतरागाछी में भी समारोह आयोजित किए गए। कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल सरकार के मंत्री दिलीप घोष, जयपुर के महापौर सुनील कोठारी, सांसद विद्युत वरण महतो (जमशेदपुर) और सांसद मंजू शर्मा (जयपुर) सहित अनेक स्थानीय प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
संबोधन के दौरान रेल मंत्री ने बताया कि यह ट्रेन मार्ग में आने वाले कई अहम स्टेशनों पर रुकेगी, जिससे जयपुर, जमशेदपुर और कोलकाता के बीच यात्रा करने वाले प्रवासी मजदूरों, कारोबारियों और विद्यार्थियों को सीधा फायदा पहुंचेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि रेलवे का प्राथमिक उद्देश्य मध्यम वर्ग और कमजोर आय वर्ग के नागरिकों को बेहतर और किफायती यात्रा विकल्प उपलब्ध कराना है।
झारखंड में चल रहे रेल कार्यों का ब्योरा देते हुए रेल मंत्री ने कहा कि राज्य का वार्षिक बजट आवंटन 450 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 7,500 करोड़ रुपये कर दिया गया है और वहां करीब 75,000 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है। उन्होंने बताया कि अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत झारखंड के गोड्डा, गोविंदपुर रोड, लोहरदगा, मधुपुर और मुरी सहित कुल 57 स्टेशनों का पुनर्विकास किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर 1,300 से अधिक स्टेशन इस योजना में शामिल हैं, जिनमें बंगाल के सांतरागाछी, हल्दिया, कामाख्यागुड़ी, जयचंडी पहाड़ और जलपाईगुड़ी रोड स्टेशन शामिल हैं।
अवसंरचना के विस्तार का उल्लेख करते हुए अश्विनी वैष्णव ने हावड़ा-खड़गपुर-चाकुलिया-टाटानगर रेलमार्ग पर चौथी लाइन के निर्माण की जानकारी दी। उन्होंने यह भी बताया कि कोलकाता मेट्रो के बेलघाटा-आईटी सेंटर वाले 4.5 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर पर काम पूरा कर ट्रायल रन शुरू कर दिया गया है, जो ग्रीन लाइन से सीधी कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगा।
कार्यक्रम में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की रेल परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार का धन्यवाद किया। मुख्यमंत्री ने बजट आंकड़ों को साझा करते हुए कहा कि 2009 से 2014 के बीच पश्चिम बंगाल को मिला औसत वार्षिक रेल बजट 4,380 करोड़ रुपये था, जो अब 2026-27 में बढ़कर 14,205 करोड़ रुपये हो चुका है। उन्होंने कहा कि यह बढ़ा हुआ वित्तीय आवंटन राज्य में मजबूत आधारभूत संरचना और व्यापक कनेक्टिविटी स्थापित करने में अहम भूमिका निभाएगा।