सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में मनीषा भनवाला ने रचा इतिहास, भारत के लिए जीता पहला स्वर्ण पदक

सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में मनीषा भनवाला ने रचा इतिहास, भारत के लिए जीता पहला स्वर्ण पदक

कजाकिस्तान की राजधानी अस्ताना में आयोजित सीनियर वर्ल्ड रेसलिंग चैंपियनशिप में भारतीय महिला पहलवान मनीषा भनवाला ने 59 किलोग्राम भार वर्ग का स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। खिताबी मुकाबले में मनीषा ने अमेरिका की एबिगेल नेट को 8-6 के अंतर से पराजित किया। मैच के एक दौर में 0-6 से पिछड़ने के बावजूद भारतीय पहलवान ने संयम नहीं खोया और शानदार वापसी करते हुए इस प्रतियोगिता में भारत को पहला स्वर्ण पदक दिलाया।

फाइनल मुकाबले की शुरुआत मनीषा के पक्ष में नहीं रही। अमेरिकी पहलवान एबिगेल नेट ने शुरुआती दांव लगाते हुए मनीषा को मैट पर गिराया और चार अंक जुटा लिए। भारतीय खेमे ने रेफरी के इस निर्णय के खिलाफ अपील की, लेकिन चुनौती खारिज होने के कारण अमेरिकी खिलाड़ी को एक अतिरिक्त अंक मिल गया। इसके तुरंत बाद मनीषा को मिली एक चेतावनी से एबिगेल की बढ़त 6-0 हो गई। हालांकि, पहले हाफ का खेल समाप्त होने से ठीक पहले मनीषा ने विपक्षी पहलवान को मैट से बाहर धकेलकर अपना खाता खोला और एक अंक हासिल कर मुकाबले में बने रहने की उम्मीद जगाई।

विश्राम के बाद दूसरे दौर में भारतीय पहलवान ने अपनी रणनीति बदली और आक्रामक खेल का प्रदर्शन किया। उन्होंने अमेरिकी खिलाड़ी पर लगातार दबाव बनाते हुए एक सफल टेकडाउन किया। इस दांव पर अमेरिकी दल ने आपत्ति जताई और दावा किया कि रेफरी पहले ही मुकाबला रोकने के लिए सीटी बजा चुके थे। उनकी यह अपील अस्वीकार कर दी गई, जिससे मनीषा के खाते में एक और बोनस अंक जुड़ गया और स्कोर का अंतर कम होकर 6-4 रह गया।

मैच में अपनी पकड़ मजबूत होने के बाद मनीषा ने ‘गट-रिंच’ तकनीक का सटीक उपयोग किया और एबिगेल को पलटते हुए दो महत्वपूर्ण अंक बटोरकर स्कोर 6-6 से बराबर कर दिया। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी पहलवान को चित (फॉल) करने का भी प्रयास किया, किंतु उसमें कामयाबी नहीं मिली। अंक बराबर होने के बाद एबिगेल ने क्राइटेरिया के आधार पर अपनी बढ़त सुरक्षित रखने की कोशिश की, लेकिन मनीषा ने अपने आक्रामक तेवर बरकरार रखे। उन्होंने अंतिम पलों में एक और टेकडाउन लगाकर स्कोर 8-6 कर दिया और समय समाप्त होने तक इस निर्णायक बढ़त को बनाए रखते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग (यूडब्ल्यूडब्ल्यू) के आंकड़ों के मुताबिक, इस प्रतियोगिता में मनीषा से पहले दो अन्य भारतीय महिला पहलवानों ने भी खिताबी मुकाबले में प्रवेश किया था। भारत की नीलम ने 50 किलोग्राम और काजल ने 76 किलोग्राम भार वर्ग के फाइनल में जगह बनाई थी, लेकिन दोनों ही खिलाड़ी स्वर्ण पदक हासिल करने से चूक गईं। ऐसे में मनीषा की इस सफलता ने भारत को प्रतियोगिता का पहला स्वर्ण पदक दिलाया।

स्वर्ण पदक के इस मुकाबले से पहले भी पूरे टूर्नामेंट में मनीषा का प्रदर्शन बेहद प्रभावशाली रहा। उन्होंने अपने अभियान की शुरुआत प्री-क्वार्टर फाइनल में कनाडा की लॉरेंस ब्यूरेगार्ड को 6-2 से हराकर की थी। इसके पश्चात, सेमीफाइनल मुकाबले में उन्होंने मंगोलिया की बोलोर्टुया खुरेलखु को पराजित कर फाइनल में अपना स्थान पक्का किया और अंततः ऐतिहासिक जीत के साथ भारतीय कुश्ती का मान बढ़ाया।

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