भारत निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत एक बड़ा दिशानिर्देश जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि जिन पुराने मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में छूट गए हैं, वे अंतिम सूची में नाम दर्ज कराने के लिए बिना किसी कानूनी भय के फॉर्म-6 भर सकते हैं। आयोग के अनुसार, पूर्व में पंजीकृत होने मात्र से ऐसे नागरिकों पर लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 31 के तहत कोई दंडात्मक या कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी, बशर्ते वे तय कानूनी प्रावधानों का पूर्ण पालन करते हों।
सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को मंगलवार को भेजे गए आधिकारिक पत्र में आयोग ने इस गतिरोध की वजह समझाई। आयोग ने रेखांकित किया कि फॉर्म-6 में पहली बार मतदाता बनने संबंधी घोषणा की अनिवार्यता के चलते कई पूर्व पंजीकृत नागरिक आवेदन करने से कतरा रहे थे। उन्हें अंदेशा था कि पहले से मतदाता रहने के कारण यह घोषणा झूठी मानी जाएगी और उनके खिलाफ अभियोजन शुरू हो सकता है।
इस संशय का निवारण करते हुए चुनाव आयोग ने साफ किया कि 1 अगस्त 2022 से प्रभावी इस घोषणा प्रारूप के बावजूद यदि किसी योग्य व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट सूची में नहीं है, तो उसे दोबारा जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 के जरिए ही नया आवेदन करना होगा। आयोग ने दो टूक शब्दों में स्पष्ट किया कि एसआईआर की कवायद के दौरान या उसके बाद नाम जुड़वाने के मकसद से भरे गए इस फॉर्म को महज पूर्व पंजीकरण के आधार पर मिथ्या घोषणा नहीं ठहराया जाएगा।
अपने इस रुख के समर्थन में आयोग ने दिल्ली उच्च न्यायालय के 14 अक्टूबर 2026 के एक हालिया फैसले का उल्लेख किया। ‘निलोत्पल दत्ता व अन्य बनाम भारत निर्वाचन आयोग व अन्य’ प्रकरण में अदालत ने याचिकाकर्ताओं के इस डर को बेबुनियाद करार दिया था कि फॉर्म-6 भरने से उन पर झूठी घोषणा का आरोप लगेगा। उच्च न्यायालय ने रिट याचिका का निपटारा करते हुए व्यवस्था दी थी कि नागरिक नियमानुसार फॉर्म-6 दाखिल करने के लिए स्वतंत्र हैं, जिस पर विधिक प्रक्रिया के तहत विचार किया जाएगा।
अदालती निर्देश के आलोक में आयोग ने निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) को हिदायत दी है कि वे केवल इस बिनाह पर धारा 31 के तहत दंडात्मक कदम न उठाएं कि पूर्व मतदाता ने नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 दिया है। हालांकि आयोग ने यह शर्त भी स्पष्ट कर दी है कि यह राहत उन्हीं आवेदकों पर लागू होगी, जिनका नाम किसी अन्य संसदीय अथवा विधानसभा क्षेत्र की सूची में दर्ज न हो और जिनका घोषणा-पत्र कानूनी रूप से पूरी तरह सही हो।
आयोग ने सभी मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को निर्देशित किया है कि इस स्पष्टीकरण को स्थानीय भाषाओं और सभी उपलब्ध मीडिया माध्यमों के जरिए जन-जन तक पहुंचाया जाए। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब एसआईआर के तहत नामों के विलोपन और पुनर्पंजीकरण को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बहस छिड़ी हुई है। आयोग की इस पहल से उन पुराने मतदाताओं की चिंताएं दूर होने की उम्मीद है जो ड्राफ्ट सूची से बाहर रह गए थे।