अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के आज पांच दिन बाद भी काबुल एयरपोर्ट के हालात खतरनाक बने हुए हैं। एयरपोर्ट के बाहर जब-तब फायरिंग होने लगती है। तालिबानी विद्रोहियों की गोली कब किसे लग जाए, कोई नहीं जानता। तालिबान लड़ाकों की क्रूरता से लोग इस तरह खौफजदा हैं कि फायरिंग होने के बावजूद भी वहां से हटने को तैरूार नहीं हैं। लोग मजबूरन महिलाओं और बच्चों को लेकर एयरपोर्ट पहुंच रहे हैं, ताकि किसी भी तरह से उन्हें देश से बाहर निकलने का मौका मिल सके।
पंजशीर में अहमद मसूद और तालिबान के वार्ताकारों के बीच बातचीत चल रही है। बहुत संभव है कि समझौता हो जाए। जब सालेह ने अपने आप को राष्ट्रपति घोषित किया था तब एक सूत्र ने बताया था कि ये उनकी अफगान सत्ता में शामिल होने की कोशिश है। इस मीटिंग में अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई भी शामिल हैं। अल जजीरा ने अपने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी रविवार को काबुल दौरे पर जाएंगे और नई सरकार के गठन को लेकर चर्चा करेंगे। वहीं पंजसीर के एक सूत्र ने कहा है कि यदि तालिबान पंजशीर पर हमला करता है तो हमें भी जवाब देना पड़ेगा।
तालिबान का प्रमुख नेता हैबतुल्लाह अखुंदाजा पाकिस्तानी में हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि विदेशी इंटेलीजेंस एजेंसीज ने अखुंदजादा से जुड़े इनपुट शेयर किए हैं। इस पर भारत भी नजर बनाए हुए है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक अधिकारी ने बताया है कि अखुंदजादा पाकिस्तानी सेना की हिरासत में हो सकता है। तालिबान के दूसरे सीनियर लीडर्स ने उसे पिछले 6 महीने से नहीं देखा है। दूसरी तरफ ऐसी खबरें भी आ रही हैं कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों ने तालिबान से मेल-मिलाप बढ़ाना शुरू कर दिया है।
भारतीय अधिकारियों ने गुरुवार को काबुल स्थित करते-परवन गुरुद्वारे में शरण लिए 60 सिखों और हिंदुओं को सुरक्षित जगह पहुंचा दिया, ताकि इन्हें भारत भेजा जा सके। हालांकि, इनमें से कई सिखों का कहना है कि वे भारत की बजाय कनाडा या अमेरिका जाना चाहते हैं, क्योंकि भारत में उनका कोई रिश्तेदार नहीं है।
अफगानिस्तान में पंजशीर से शुरू हुआ तालिबान के विरोध का सिलसिला राजधानी काबुल तक पहुंचने से तालिबानी परेशान नजर आ रहे हैं। विरोध के स्वरों को दबाने के लिए अब उसने अफगानिस्तान के इमामों से अपील की है कि लोगों को समझाकर एकजुट करें। तालिबान की चिंता इसलिए बढ़ गई है, क्योंकि अफगानिस्तान का राष्ट्रीय ध्वज लेकर प्रदर्शन करने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। तालिबान ने दो दिन पहले जलालाबाद में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर गोलियां भी चलाईं, लेकिन विरोध कम नहीं हो रहा।
तालिबान ने दावा किया था कि किसी भी देश के दूतावास को निशाना नहीं बनाया जाएगा, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि तालिबान ने कंधार और हेरात में भारतीय कॉन्सुलेट की तलाशी ली है। तालिबानियों ने बुधवार को दोनों कॉन्सुलेट में पहुंचकर दस्तावेज खंगाले और वहां खड़ी कारें भी ले गए।