पेट्रोल और डीजल को GST सिस्टम में लाना आसान नहीं होगा, इसमें समय लगेगा। ब्रोकरेज फर्म निर्मल बंग की रिपोर्ट के मुताबिक, उसमें राज्यों को रेवेन्यू लॉस न हो, ऐसा रेट तय करने के लिए कई दौर की वार्ता होगी। जानकार बताते हैं कि दोनों ईंधन GST के दायरे में आ गए, तो बजट और कमाई से जुड़े फैसले लेने में राज्यों के हाथ बंध जाएंगे।
कोविड शुरू होने के बाद पहली बार वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में GST काउंसिल की फिजिकल मीटिंग हो रही है। बैठक में काउंसिल के सदस्य आमने-सामने बैठ कर टैक्स से जुड़े अहम मसलों पर चर्चा कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक काउंसिल के एजेंडे में पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने सहित कई सामग्रियों पर लगने वाले टैक्स रेट में बदलाव करना शामिल है।
GST सिस्टम अपनाने से राज्यों को जो रेवेन्यू लॉस हो रहा है, उसकी भरपाई के लिए वसूले जाने वाले सेस को 2022 के बाद भी जारी रखने पर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा कोविड से जुड़ी सामग्री पर लगने वाले टैक्स रेट में कटौती जारी रखने का प्रस्ताव भी आ सकता है।
जहां तक पेट्रोल और डीजल को GST के दायरे में लाने की बात है तो ऐसा करने पर दोनों ईंधन बहुत सस्ते हो जाएंगे। लेकिन इसके लिए राज्यों को राजी करना आसान नहीं होगा, क्योंकि केंद्र को वह टैक्स रेट निकालना होगा जिस पर उन्हें लॉस न हो। पेट्रोल और डीजल राज्य सरकारों की कमाई का बड़ा जरिया हैं, जिसे वे केंद्र के हाथों में देना नहीं चाहतीं।
एक विदेशी एकांउटिंग फर्म के टैक्स एक्सपर्ट ने कहा, ‘पेट्रोल और डीजल GST के दायरे में आ गए, तो बजट और कमाई से जुड़े फैसले लेने के मामले में राज्यों के हाथ बंध जाएंगे। राजनीतिक रूप से संवेदनशील मामला होने के चलते इससे ज्यादा होने की संभावना नहीं है। मीटिंग में कुछ सिफारिशें हो सकती हैं और नई कमेटी बनाई जा सकती है।’
दरअसल, राज्यों ने इनसे कमाई के लिए अलग तरह की टैक्स व्यवस्था बनाई हुई है, जिनके तहत इन पर कई तरह के टैक्स लगते हैं। इसी वजह से इंडिया में पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई देशों से काफी ज्यादा हैं। क्रूड प्राइस, ढुलाई का खर्च, डीलर का कमीशन और केंद्र का उत्पाद शुल्क जोड़े जाने के बाद राज्य पेट्रोल और डीजल पर टैक्स लगाते हैं।
गुरुवार को जारी ब्रोकरेज फर्म निर्मल बंग की रिपोर्ट के मुताबिक, ‘राज्य पेट्रोल-डीजल और नेचुरल गैस पर वैट लगाते हैं। GST सिस्टम में राज्यों को रेवेन्यू लॉस न हो, ऐसा रेट तय करने के लिए कई दौर की वार्ता होगी। जो राज्य पेट्रोल और डीजल पर 28% से ज्यादा टैक्स वसूल करते हैं, उनको GST रेट के सबसे ऊपरी स्लैब में भी रेवेन्यू लॉस होगा।