राज्य सरकार के खिलाफ सर्व आदिवासी समाज के प्रदेश बंद के एक दिन बाद कांग्रेस की डिनर पॉलिटिक्स सामने आई है। मुख्यमंत्री निवास में मंगलवार रात बस्तर के आदिवासी समाज के प्रमुखों के लिए भोज का आयोजन हुआ। बस्तर के प्रभारी मंत्री कवासी लखमा करीब 300 लोगों को लेकर मुख्यमंत्री निवास पहुंचे। यहां मुख्यमंत्री ने सभी से बात की। इस दौरान उन्होंने बस्तर संभाग के स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में छात्रावास की सुविधा देने की भी घोषणा की।
रात के भोज में व्यवस्था का जिम्मा खुद कवासी लखमा ने संभाल लिया। उन्होंने होटल से आए रसोइए को हटाकर पकौड़े की कड़ाही खुद संभाल ली। भोज के दौरान मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, मंत्री कवासी लखमा और बस्तर क्षेत्र के कांग्रेस विधायकों ने आदिवासी समाज के प्रमुखों और प्रतिनिधियों के साथ भोजन किया। इस दौरान बस्तर की समस्याओं पर चर्चा हुई। चर्चा के दौरान लोगों ने कहा कि राज्य सरकार ने इंग्लिश मीडियम स्कूल प्रारंभ कर गरीब और आदिवासी परिवारों के बच्चों की शिक्षा के लिए एक अच्छी पहल की है। इन स्कूलों में छात्रावास हो जाए तो बस्तर के दूर-दराज के बच्चों को भी इसका फायदा मिल पाएगा।
मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उन्हें भरोसा दिया कि बस्तर संभाग में जहां भी स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूल खुले हैं वहां बच्चों के लिए हॉस्टल की भी व्यवस्था की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा, राज्य सरकार की यह मंशा है कि आदिवासी अंचलों के लोगों को भी वैसी ही सुविधाएं मिले जैसी मैदानी क्षेत्रों के लोगों को मिल रही हैं। राज्य सरकार आदिवासी अंचलों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के बेहतर से बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है। यह डिनर पॉलिटिक्स आदिवासी समाज की नाराजगी दूर करने में कितना कामयाब होती है यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा।
आदिवासी समाज के प्रतिनिधिमंडल में गोंड, धुरवा, हल्बा, दोरला, मुरिया, माड़िया सहित विभिन्न आदिवासी समाज के प्रतिनिधि शामिल थे। विधानसभा उपाध्यक्ष मनोज मंडावी, संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी, विधायक रेखचंद जैन, चंदन कश्यप, संतराम नेताम, राजमन वेंजाम और विक्रम मंडावी इस भोज में शामिल थे।
पिछले सप्ताह मुख्यमंत्री ने ऐसी ही मुलाकात छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के बीपीएस नेताम धड़े से की थी। यह वह मौका था जब आदिवासी समाज का सोहन पोटाई धड़ा 20 सितम्बर के प्रदेश बंद के लिए जिलों में बैठकें कर रहा था। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने आदिवासी समाज की शिकायतों को दूर करने के लिए मंत्रिमंडलीय उपसमिति और सचिवों की एक समिति बनाने की घोषणा की थी।छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज का सोहन पोटाई धड़ा जुलाई महीने से ही राज्य सरकार के खिलाफ आंदोलित है। आंदोलन के बाद भी सरकार की ओर से समाधान की पेशकस नहीं होने से नाराज समाज ने 30 अगस्त को आर्थिक नाकेबंदी की थी। बात नहीं बनी तो सोमवार को प्रदेश बंद के नारे के साथ आदिवासी समाज सोमवार को फिर सड़कों पर उतर आया। धमतरी, कुरूद, मगरलोड, बालोद, कांकेर, गरियाबंद, डौंडी लोहारा, कोरबा, कोण्डागांव में राजमार्गों पर प्रदर्शन हुए। रायपुर-जगदलपुर नेशनल हाईवे तो सात जगह रोका गया।