स्कूलों में कोरोना पर सरकार को सूचना का इंतजार:

कोरोना संक्रमण की तीसरी लहर की आशंकाओं के बीच मंगलवार को बेमेतरा और महासमुंद जिले के दो स्कूलों में 12 बच्चे कोरोना पॉजिटिव आए हैं। विशेषज्ञों ने इसे गंभीर खतरा बताया है। वहीं सरकार को सूचना का इंतजार है। स्कूल शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के सचिव डॉ. आलोक शुक्ला ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि उन्हें अभी तक ऐसी कोई सूचना नहीं मिली है। उन तक सूचना पहुंचेगी, उसके बाद उससे निपटने का एक्शन प्लान बनाया जाएगा।जवाहरलाल नेहरु मेडिकल कॉलेज रायपुर में क्रिटिकल केयर विशेषज्ञ डॉ. ओपी सुंदरानी का कहना है कि बच्चों में अब तक कोरोना के गंभीर मामले सामने नहीं आए हैं। ऐसे में एक स्कूल में 7 मरीजों का मिलना गंभीर बात है। पिछले कई सप्ताह से किसी एक क्लस्टर में एक साथ इतने मरीज नहीं मिले थे। यह खतरा बढ़ा सकता है। पूरे स्कूल की जांच होगी तो यह संख्या बढ़ भी सकती है। बच्चों के परिजनों और संपर्क में आए दूसरे लोगों की भी जांच करनी चाहिए।

डॉ. सुंदरानी ने बताया कि सभी स्कूल खुल गए हैं। बच्चों का टीकाकरण भी नहीं हुआ है। ऐसे में कोरोना को रोकने के अभी दो ही प्रभावी उपाय हैं। पहला मास्क और दूसरा हाथ को साबुन-पानी से धुलते रहना या सेनिटाइज करते रहना। परिजनों को अपने बच्चों को इसके लिए अच्छे से प्रशिक्षित करना होगा। उन्हें बताना होगा कि स्कूल में वे मास्क न निकालें। हाथ को सेनिटाइज करते रहें ताकि कोरोना से बचे रहें।मार्च 2021 के बाद शुरू हुई कोरोना की दूसरी लहर से अप्रैल-मई महीने में छत्तीसगढ़ में स्थिति बेहद गंभीर हो गई थी। इस दौरान सबसे अधिक लोगों की मौत हुई। विशेषज्ञों ने कोरोना की तीसरी लहर की आशंका जताई है। इसमें बच्चों को सबसे अधिक खतरा होने की आशंका है। केंद्र सरकार ने तीसरी लहर से निपटने की तैयारियों में बच्चों की इलाज सुविधाओं पर फोकस किया है। बताया जा रहा है कि रायपुर एम्स और मेडिकल कॉलेज में बच्चों के लिए 50-50 बेड की व्यवस्था की गई है। इसमें आईसीयू और वेंटिलेटर सुविधा भी शामिल हैं। सभी जिलों में बच्चों के लिए 40-40 बेड का वार्ड तैयार है। इसमें 20 बेड आईसीयू और 20 वेंटिलेटर सुविधा वाले हैं। कर्मचारियों को वेंटिलेटर इस्तेमाल करने का प्रशिक्षण भी दिया गया है।

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